Prayagraj: क्या हो अगर कोई दरख्त खुद में क्रांति की यादों को सहेज कर रखे हुए हो, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बरगद का एक विशाल पेड़ खामोशी के साथ देश की आजादी का गवाह बने हुए आज भी खड़ा है। इसकी शाखाएं देश के नक्शे के आकार के एक चबूतरे के ऊपर फैली हुई हैं, जिस पर 1947 का साल दर्ज है।
यहां के लोगों का मानना है कि उस जमाने में ये क्रांतिकारियों के मिलने की जगह हुआ करती थी, जहां आजादी के विचारों का आदान-प्रदान होता था, रणनीतियों पर चर्चा की जाती थी और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष की योजना बनाई जाती थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “ये जैसा की हम लोगों के बुजुर्गों ने बताया है हमारे यहां के लोगों ने पुराने लोगों ने बताया है कि 1947 में जब आजादी मिली थी उससे पुराना ये पेड़ है। ये चबूतरा बना हुआ है, जिसमें भारत का नक्शा एक बना हुआ है उसमें लिखा हुआ है 1947 और बोर्ड भी लगा हुआ है। यहीं से भारत की आजादी की जंग जीती गई है।”
अब जब भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, तब प्रयागराज में बरगद का ये दरख्त अपने आन-बान और शान से खड़ा है; इसकी जड़ें बीते हुए कल में बेहद मजबूती से जमी हुई हैं और इसकी कहानी साहस, बलिदान और आजादी के लंबे सफर को याद करते हुए आज की और आने वाले पीढ़ियों को हमेशा-हमेशा प्रेरित करती रहेगी।