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लेबनान संघर्ष का असर, 5,000 बांग्लादेशी श्रमिकों की नौकरी गई, हजारों पर संकट गहराया

लेबनान में जारी संघर्ष और हालिया इजरायली हमलों के कारण करीब 5,000 बांग्लादेशी श्रमिकों की नौकरी चली गई है। इसके चलते वे गंभीर संकट में फंस गए हैं। कई मजदूर बेघर हो गए हैं और उनके सामने भोजन, रहने और सुरक्षा की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। शरणार्थी एवं प्रवासी आंदोलन अनुसंधान इकाई (RMMRU) की कार्यकारी निदेशक तस्नीम सिद्दीकी ने बताया कि इन श्रमिकों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, बांग्लादेश वापस लाने या उनके लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि लेबनान में काम कर रही बांग्लादेशी महिला घरेलू कामगारों की स्थिति और भी कठिन है, क्योंकि उन्हें घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। उन्होंने बताया कि दीपाली नाम की 34 वर्षीय एक बांग्लादेशी महिला की भी इस संघर्ष में मौत हो चुकी है। बांग्लादेश सरकार ने दक्षिण लेबनान में इजरायली हमले में दो बांग्लादेशी नागरिकों की मौत पर गहरा दुख जताया है।

मृतकों की पहचान शफीकुल इस्लाम और नाहिदुल इस्लाम नाहिद के रूप में हुई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि लेबनान स्थित दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर दोनों के पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। सरकार ने क्षेत्र में जारी हिंसा और आम नागरिकों की मौत पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की अपील की है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर बांग्लादेशी प्रवासी श्रमिकों पर भी पड़ा है। इस क्षेत्र में लगभग 50 लाख बांग्लादेशी काम करते हैं, जिनसे देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। 2025 में पश्चिम एशिया से बांग्लादेश को 15.07 अरब डॉलर की रेमिटेंस मिली थी। संघर्ष के कारण बांग्लादेश ने ईरान से अपने नागरिकों को निकालना भी शुरू कर दिया है। अब तक दो चरणों में 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि संकट के चलते अरब देशों में बांग्लादेशी श्रमिकों की मांग कम हुई है और नए रोजगार बाजार तलाशने की आवश्यकता है।