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गुजरात की 24×7 एयर एंबुलेंस सेवा ने पूरे किए 98 मिशन, 50 बार अंगों को पहुंचाया अस्पताल

गुजरात सरकार की 24 घंटे उपलब्ध एयर एंबुलेंस सेवा ने वर्ष 2022 में शुरू होने के बाद से अब तक 98 उड़ान मिशन पूरे कर लिए हैं। यह सेवा जल्द ही 100 मिशन पूरे करने का आंकड़ा पार करने वाली है। इस सेवा के जरिए गंभीर मरीजों को जल्द अस्पताल पहुंचाने के साथ-साथ अंग प्रत्यारोपण के लिए जरूरी मानव अंगों को भी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा रहा है।

गुजरात सरकार के अनुसार, अब तक पूरे हुए 98 मिशनों में से 48 मिशन मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किए गए, जबकि 50 मिशन मानव अंगों के परिवहन के लिए थे। इस पहल का उद्देश्य आपात स्थिति में मरीजों को कम से कम समय में बेहतर और विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

गंभीर मरीजों को जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने एयर एंबुलेंस सेवा शुरू की थी। राज्य के उपमुख्यमंत्री और नागरिक उड्डयन विभाग का जिम्मा संभाल रहे हर्ष संघवी ने बताया कि यह सेवा नागरिक उड्डयन विभाग और गुजरात स्टेट एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लिमिटेड (GUJSAIL) के माध्यम से संचालित की जाती है।

इस सेवा के लिए VT-GUJ पंजीकरण वाला बीचक्राफ्ट किंग एयर B200 विमान तैनात है। यह विमान 24 घंटे उपलब्ध रहता है। मरीज की हालत, जरूरत और दूरी के अनुसार इसमें डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था की जाती है।

108 एंबुलेंस सेवा से होता है समन्वय

एयर एंबुलेंस सेवा में 108 आपातकालीन सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका है। जब किसी मरीज को हवाई माध्यम से अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है, तो मामला GUJSAIL के फ्लाइट ऑपरेशन विभाग को भेजा जाता है। इसके बाद विमान, मेडिकल टीम, एयरपोर्ट अधिकारियों, सड़क परिवहन और संबंधित अस्पताल के बीच समन्वय किया जाता है।

अस्पताल भी जरूरत पड़ने पर सीधे एयर एंबुलेंस की मांग कर सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य मरीज को अस्पताल से एयरपोर्ट, फिर विमान के जरिए दूसरे स्थान तक और वहां से संबंधित अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया को सुचारु बनाना है।

छोटे एयरस्ट्रिप से भी उड़ान भरने की क्षमता

इस सेवा की एक खास बात यह है कि विमान आवश्यक परिचालन, मौसम और सुरक्षा शर्तें पूरी होने पर छोटे एयरस्ट्रिप से भी संचालन कर सकता है। इससे दूरदराज के इलाकों में मौजूद मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। ऐसे मामलों में सड़क से तय की जाने वाली दूरी और समय को कम करने का विकल्प मिलता है।

एयर एंबुलेंस सड़क पर चलने वाली एंबुलेंस का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी पूरक व्यवस्था है। जहां सड़क से मरीज को पहुंचाना मुश्किल हो या दूरी और समय के कारण खतरा बढ़ सकता हो, वहां हवाई परिवहन उपयोगी साबित हो सकता है।

अंग प्रत्यारोपण के लिए भी अहम सेवा

एयर एंबुलेंस के 98 मिशनों में से 50 मिशन मानव अंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किए गए हैं। अंग प्रत्यारोपण में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उपलब्ध अंग को निर्धारित समय के भीतर संबंधित अस्पताल और प्रत्यारोपण टीम तक पहुंचाना जरूरी होता है।

ऐसे में एयर एंबुलेंस अस्पतालों और ट्रांसप्लांट टीमों को अंगों का तेजी से परिवहन करने में मदद करती है। इससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग मिलता है।

कितना है एयर एंबुलेंस का शुल्क?

गुजरात सरकार इस सेवा को रियायती दरों पर उपलब्ध करा रही है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, शुल्क इस प्रकार है:

  • गुजरात के मरीजों के लिए: ₹50,000

  • गुजरात के बाहर के मरीजों के लिए: ₹65,000

  • अस्पताल के माध्यम से बुकिंग पर: ₹55,000

यह सेवा केवल गुजरात तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के नागरिक इसका लाभ ले सकते हैं। इसके संचालन में नागरिक उड्डयन विभाग, GUJSAIL, 108 आपातकालीन सेवा, पायलट, मेडिकल टीम, अस्पताल, एयरपोर्ट अधिकारी और ग्राउंड सपोर्ट टीमें मिलकर काम करती हैं। गुजरात सरकार की यह पहल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और गंभीर मरीजों को समय पर विशेष चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।