वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता के तहत आंध्र प्रदेश में एक वरिष्ठ माओवादी नेता समेत आठ अन्य कैडरों ने सोमवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वरिष्ठ माओवादी नेता चेल्लुरी नारायण राव, उर्फ सुरेश, जो सेंट्रल कमेटी के सदस्य और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी के सचिव थे, ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के सामने आत्मसमर्पण किया। वे करीब 36 वर्षों से सीपीआई (माओवादी) से जुड़े थे और संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे। उनके साथ आठ अन्य माओवादी कैडरों ने भी हथियार डाल दिए।
इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई बार यह दोहरा चुके हैं कि सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले एक साल में कई माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा को अपनाया है। हाल ही में 25 मार्च को ओडिशा में मोस्ट वांटेड माओवादी नेता सुक्कू समेत चार अन्य ने भी पुलिस के सामने सरेंडर किया था। एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजीव पांडा के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने पांच हथियार भी जमा किए, जिनमें एक AK-47, एक INSAS राइफल और एक सिंगल-शॉट गन शामिल है।
संजीव पांडा ने बताया कि कंधमाल जिले में अब माओवादियों की संख्या एकल अंक में रह गई है, यानी केवल 8-9 लोग बचे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में एंटी-नक्सल ऑपरेशन और तेज किए जाएंगे ताकि 31 मार्च के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। उन्होंने शेष माओवादियों से आत्मसमर्पण करने की अपील भी की।
वहीं छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में, जो नक्सल आंदोलन का प्रमुख गढ़ माना जाता है, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य पप्पा राव समेत 17 अन्य माओवादियों ने 17 मार्च को आत्मसमर्पण किया था। आईजी बस्तर पी. सुंदरराज ने कहा, “दंडकारण्य में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वविहीन हो गया है।” हाल के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पणों के पीछे पुनर्वास और माओवादियों को मुख्यधारा में लाने की नीति अहम भूमिका निभा रही है।