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लोन फ्रॉड केस में बड़ी कार्रवाई, अनिल अंबानी ग्रुप के पूर्व अधिकारी अमिताभ झुनझुनवाला गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक लोन धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ झुनझुनवाला को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के बाद उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत हिरासत में लिया गया. 

ED ने झुनझुनवाला को अदालत में पेश कर विस्तृत पूछताछ के लिए उनकी कस्टडी मांगी है. यह जांच अनिल अंबानी समूह की कंपनियों, जैसे रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के जरिए कथित बैंक लोन धोखाधड़ी से जुड़ी है, जिसमें शेल या फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है. बताया गया है कि अमिताभ झुनझुनवाला मार्च 2003 से सितंबर 2019 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड में निदेशक रह चुके हैं, जो इन कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है. मामले में आगे की जांच जारी है.

जांच एजेंसियों के मुताबिक, अनिल अंबानी समूह की कंपनियों पर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि को अवैध तरीके से इधर-उधर करने का आरोप है. ईडी अब तक करीब 17,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर चुकी है, जिनमें 3,700 करोड़ रुपये की 'एबोड' नामक आवासीय संपत्ति भी शामिल है.

ईडी की जांच में सामने आया है कि आरएचएफएल और आरसीएफएल ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन जुटाया, जिसमें से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एनपीए में बदल गई. आरोप है कि इस धन को शेल या फर्जी कंपनियों के जरिए रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कैपिटल में ट्रांसफर किया गया.

जांच में यह भी पाया गया कि इन शेल कंपनियों के पास न तो पर्याप्त वित्तीय क्षमता थी और न ही कोई वास्तविक कारोबार. ईडी का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क सार्वजनिक धन की हेराफेरी के लिए तैयार किया गया था. अमिताभ झुनझुनवाला अनिल अंबानी के करीबी माने जाते हैं, वे समूह में अहम फैसलों और वित्तीय संचालन में भूमिका निभाते थे. वहीं अमित बापना भी रिलायंस फाइनेंस के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं.

ईडी ने कहा है कि इस मामले में समूह के प्रमोटर्स और प्रमुख लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है और जांच के दौरान फंड डायवर्जन का पूरा तरीका उजागर किया गया है. एजेंसी ने स्पष्ट किया कि वित्तीय अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर सही दावेदारों को लौटाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी.