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NCERT ने जारी की कक्षा 9 की नई हिंदी किताब ‘गंगा’, NEP 2020 के तहत बड़ा कदम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एनसीईआरटी ने शुक्रवार को कक्षा 9 की नई हिंदी पाठ्यपुस्तक जारी की। ‘गंगा’ नामक इस पुस्तक को भारतीय सभ्यता में गंगा नदी की प्रतीकात्मक भूमिका को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो हिंदी भाषा के देशभर में निरंतर प्रवाह और प्रसार को दर्शाती है। इस किताब में रैदास के पद, ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’, ‘भारती जय विजयी करे’ और ‘झांसी की रानी’ जैसी रचनाएं शामिल हैं, जो भाषा सीखने के साथ-साथ भक्ति, राष्ट्रवाद और काव्य का समन्वय प्रस्तुत करती हैं।

पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि जैसे गंगा नदी हमारी सभ्यता और संस्कृति की पहचान है, उसी तरह हिंदी भी देश के बड़े हिस्से में बोली, समझी और पढ़ी जाती है। यह किताब भक्ति और राष्ट्रवादी विषयों के बीच संतुलन बनाने के साथ-साथ भाषाई कौशल पर भी विशेष ध्यान देती है। रैदास के पद समानता और भक्ति का संदेश देते हैं, वहीं रामचरितमानस से लिया गया ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाता है। निराला की ‘भारती जय विजयी करे’ और सुभद्रा कुमारी चौहान की ‘झांसी की रानी’ जैसी कविताएं देशभक्ति और वीरता की भावना को उजागर करती हैं, जबकि भवानी प्रसाद मिश्र की ‘घर की याद’ भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती है।

पाठ्यपुस्तक में भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय नायकों पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसमें झलकारी बाई का जीवन परिचय शामिल है, जिन्होंने 1857 के विद्रोह में वीरता से संघर्ष किया था। साथ ही परम वीर चक्र विजेता निर्मलजीत सिंह सेखों पर भी एक पाठ दिया गया है, जिसमें उनके बचपन, शिक्षा और उड़ान के प्रति रुचि का उल्लेख है। पुस्तक में लाला लाजपत राय के विचार भी शामिल किए गए हैं, जिनमें उन्होंने नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर जोर देते हुए कहा है कि स्वतंत्रता का आधार अनुशासन है और बिना अनुशासन के स्वतंत्रता टिक नहीं सकती।

यह पाठ्यपुस्तक छात्रों की भाषा क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास करती है। इसमें प्रमुख लेखकों की गद्य और पद्य रचनाओं का समावेश है। गद्य भाग में प्रेमचंद की ‘दो बैलों की कथा’, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की ‘क्या लिखूं?’ और शेखर जोशी की ‘संवदहीन’ जैसी रचनाएं शामिल हैं, जो मानवीय मूल्यों, रचनात्मकता और आधुनिक जीवन की भावनात्मक दूरी को दर्शाती हैं।

इसके अलावा लता मंगेशकर का साक्षात्कार, मोहन राकेश का यात्रा-वृत्तांत ‘आखिरी चट्टान तक’ और जगदीश चंद्र माथुर की ‘रीढ़ की हड्डी’ जैसी रचनाएं भी पुस्तक में शामिल हैं, जो विवाह और महिला शिक्षा से जुड़े पारंपरिक विचारों को चुनौती देती हैं। अन्य सामग्री में संत नामदेव और मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएं तथा मातृभाषा के महत्व को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां भी शामिल हैं, जो पाठ्यक्रम को और समृद्ध बनाती हैं। NCERT वर्ष 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम (NCF 2023 / NEP 2020) के तहत कक्षा 9 की पुस्तकों को चरणबद्ध तरीके से जारी कर रहा है। इससे पहले कक्षा 1 से 8 तक की नई किताबें जारी की जा चुकी हैं।