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क्या है पूजा स्थल अधिनियम 1991, जो बन गया है भारतीय राजनीति का केंद्र

New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की उस याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई जिसमें पूजा स्थलों पर 1991 के कानून को लागू करने की मांग की गई है। ये कानून किसी जगह के धार्मिक चरित्र को उसी तरह बनाए रखने के लिए है, जैसा वो 15 अगस्त 1947 को था।

हालांकि इस अधिनियम में कुछ अपवाद भी हैं। ये अधिनियम प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों या अवशेषों पर लागू नहीं होता। इसके लिए प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 में प्रावधान किया गया है।

अयोध्या में राम जन्मभूमि और विवादित ढांचे से जुड़े विवाद को भी इसी अपवाद के तहत पूजा स्थल अधिनियम 1991 के दायरे से बाहर रखा गया है। अधिनियम के उल्लंघन के लिए सजा के तौर पर तीन साल की जेल और जुर्माना शामिल है।