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Delhi: मानसून से पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग जरूरी, पर्यावरणविदों ने की सख्ती से पालन करने की मांग

Delhi: दिल्ली सरकार की तरफ से जारी हालिया निर्देश के मुताबिक, मानसून आते ही राजधानी को बारिश का पानी इकट्टा करना होगा। ये इस तरह का पहला कदम नहीं है। तकनीकी तौर पर, दिल्ली के बिल्डिंग बाय-लॉज़ में इस प्रक्रिया को 2001 में ही जरूरी कर दिया गया था। 2012 में इसका दायरा बढ़ाया गया और फिर 2019 के आस-पास इसमें और भी सख्त सजा के प्रावधान जोड़े गए।

नए निर्देश के मुताबिक, 100 वर्ग मीटर या उससे ज्यादा क्षेत्रफल वाले सभी रिहायशी, कमर्शियल और संस्थागत प्लॉट और इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना जरूरी है। पर्यावरणविद इसे जमीन के नीचे पानी के कम होते स्तर को बढ़ाने और बारिश के पानी को नालों में बर्बाद होने से बचाने का सबसे आसान और असरदार तरीका बताते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, असली चुनौती इसे लागू करने में है। वो बताते हैं कि नियमों का पालन ठीक से हो, इसके लिए राजनैतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। बहरहाल, जैसे-जैसे दिल्ली घटते भू-जल स्तर और गर्मियों में बार-बार होने वाली पानी की कमी से जूझ रही है, वर्षा जल संचयन का प्रभावी ढंग से लागू होना बेहद अहम साबित हो सकता है।

वर्षा जल संचयन—छतों या पक्की सतहों से बारिश के पानी को इकट्ठा करने, छानने और जमा करने की प्रक्रिया है, जिसे आम तौर पर बागवानी, सिंचाई, टॉयलेट फ्लश करने और कपड़े धोने जैसे कामों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। भारत के कई ऐसे इलाकों में जहां पानी की कमी है, इन तरीकों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से लंबे अर्से से किया जा रहा है।