प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड के रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय पर हुए बम हमले के मामले में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। ED की दिल्ली जोनल टीम ने दिल्ली, बिहार, झारखंड और कर्नाटक में चार ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। ये ठिकाने मामले से जुड़े संदिग्धों से संबंधित बताए जा रहे हैं।
ED ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत की है। जांच एजेंसी का उद्देश्य हमले में शामिल आरोपियों के कथित अवैध वित्तीय लेनदेन और पैसों के स्रोत का पता लगाना है। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में मूल अपराध राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जुड़ा है। NIA ने 17 जून 2026 को रांची के निवरनपुर स्थित RSS के क्षेत्रीय कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच अपने हाथ में ली थी। 17 जून की रात करीब 12:30 बजे दो लोगों ने मिर्च सॉस की बोतलों से बनाए गए देसी पेट्रोल बम RSS कार्यालय की ओर फेंके थे। इससे थोड़ी देर के लिए आग लगी, जो अपने आप बुझ गई। घटना में किसी को चोट नहीं आई और संपत्ति को भी कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
NIA की जांच में गिरफ्तार स्थानीय संदिग्धों, जिनमें सैफ अंसारी और अमन अंसारी शामिल हैं, के कथित तौर पर ISI से वित्त पोषित संगठन तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (TTH) से संबंध होने की बात सामने आई। जांच के अनुसार, संदिग्धों के कट्टरपंथी बनाए जाने और दुबई की यात्राओं के दौरान संपर्क में आने की जानकारी मिली है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि वे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए हैंडलर्स से संपर्क करते थे।
इसी दौरान ED ने हरियाणा के पूर्व राज्य मंत्री और कारोबारी गोपाल गोयल कांडा से जुड़े गुरुग्राम के तीन ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई करीब 248.46 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की जा रही है। ED की गुरुग्राम यूनिट की जांच रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड से जुड़े कथित बड़े घोटाले पर केंद्रित है। आरोप है कि निवेशकों को व्यावसायिक परियोजनाओं में पैसा लगाने के लिए समय पर कब्जा देने, निश्चित रिटर्न, लीज रेंट और बिक्री विलेख (Sale Deed) तैयार करने का भरोसा दिया गया था।
जांच के दायरे में आने वाली चार परियोजनाओं में 661 निवेशकों से लगभग 248.46 करोड़ रुपये लिए गए। हालांकि, अब तक निवेशकों को न तो संपत्तियों का कब्जा दिया गया और न ही वादे के अनुसार बिक्री विलेख तैयार किए गए। ED के मुताबिक, इस मामले में तलाशी की कार्रवाई घर खरीदारों से मिले पैसों के कथित डायवर्जन और उनके वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर शुरू की गई है। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर डायवर्ट किए गए पैसे बाद में कांडा से जुड़ी विभिन्न कंपनियों में ट्रांसफर किए गए। तलाशी अभियान सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस के साथ समन्वय कर चलाया जा रहा है। दोनों मामलों में ED की कार्रवाई जारी है।