संसद के मानसून सत्र में राज्यसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा चल रही है, इस दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा कर लिया है। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति को लेकर भी बयान दिया, जिस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। सरकार की ओर से उनकी बयान को आशांति फैलाने वाला करारा दिया गया है।
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई। सरकार क्या कर रही थी, क्या एजेंसियां सो रही थीं? शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है। शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है। यूनिवर्सिटी में आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं। बजट में छह फीसदी भागीदारी शिक्षा बजट की होनी चाहिए, लेकिन तीन फीसदी से भी कम है।
किस बयान के बाद शुरू हुआ हंगामा-
खरगे ने कहा, विश्वविद्यालयों में अच्छे शिक्षक, अच्छे वीसी आएं, लेकिन आप जो सिलेबस बदल रहे हैं, उसमें ये भी आ रहा है, शूद्र के वेद पाठ सुनने पर शीशे और जस्ते से उसके कान भर दिए जाए। वेद मंत्र का उच्चारण करने पर उसकी जीभ काट ली जाए, ये आरएसएस सिलेबस है। ऐसे विचारों की निंदा करता हूं। ऐसी सामग्री को सिलेबस से हटाया जाए। यूपीए सरकार ने सबको समान शिक्षा के लिए शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया। खरगे इस बयान के बाद संसद में हंगामा शुरू हो गया।
खरगे के बयान की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता ने जो कहा है, वह मेरी जानकारी में तथ्यों से परे है। अगर इस बात कोई तथ्य है तो वो प्रमाणित करें। वो मनुस्मृति के मूल पाठ को प्रमाणित करें। इसके बाद नड्डा ने कहा कि भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को इस विषय पर अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।