मणिपुर के उखरुल जिले में कथित तौर पर हथियारबंद उग्रवादियों ने कई घरों में आग लगा दी, जिसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है। यह घटना तब हुई जब तांगखुल नागा समुदाय के एक सदस्य पर कुछ लोगों ने हमला किया था। रविवार शाम को जिले के लिटन गांव में दो आदिवासी समूहों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसके बाद प्रशासन को धारा 144 लगानी पड़ी।
सोमवार आधी रात के आसपास, लिटन सरेखोंग में तांगखुल नागा समुदाय के सदस्यों के कई घरों में कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों ने आग लगा दी। पास के इलाके में कुकी समुदाय के कुछ घरों में भी आग लगाई गई। तांगखुल मणिपुर की सबसे बड़ी नागा जनजाति है। लिटन सरेखोंग एक कुकी गांव है। वायरल हो रहे वीडियो फुटेज में हथियारबंद लोग गांव में घरों और गाड़ियों में आग लगाते दिख रहे हैं, और मिलिट्री ड्रेस पहने उग्रवादी हवा में आधुनिक हथियारों से फायरिंग कर रहे हैं।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही को रोकने के लिए महादेव, लंबुई और शांगकाई और लिटन की ओर जाने वाले अन्य इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। रविवार शाम को सुरक्षा बलों ने लिटन सरेखोंग गांव में आपस में भिड़े दो आदिवासी समूहों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। उखरुल जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन में कहा गया है कि तांगखुल नागा और कुकी समुदायों के सदस्यों के बीच तनाव के कारण गांव में शांति भंग होने की आशंका है।
डीएम आशीष दास ने नोटिफिकेशन में कहा कि रविवार शाम 7 बजे से अगले आदेश तक किसी भी व्यक्ति के अपने घर से बाहर निकलने पर रोक है। इसमें कहा गया है कि यह आदेश सरकारी अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों पर लागू नहीं होगा।
शनिवार रात लिटन गांव में तांगखुल नागा समुदाय के एक सदस्य पर सात से आठ लोगों द्वारा कथित तौर पर हमला किए जाने के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई।
इस मामले को पीड़ित पक्ष और लिटन सरेखोंग के मुखिया ने सुलझा लिया था, और दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से पारंपरिक तरीकों से इस मुद्दे को हल करने पर सहमति जताई थी, जिसके लिए रविवार को एक बैठक तय की गई थी। हालांकि, बैठक नहीं हुई। इसके बजाय, पास के सिकिबुंग गांव के कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर लिटन सारेखोंग के मुखिया के घर पर हमला कर दिया। लिटन पुलिस स्टेशन के पास से गुजरते समय ग्रामीणों ने सात राउंड गोलियां भी चलाईं।