Breaking News

अमेरिकी झटके के बावजूद ग्रीन में खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल     |   दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट ने बढ़ाई व्यापारियों की चिंता, कहा- नई गाइडलाइंस जारी करे सरकार     |   ओडिशा: एंबुलेंस में लगी आग, एक मरीज की मौत, दो गंभीर रूप से जख्मी     |   IIT बॉम्बे कैंपस में गैस लीकेज से भड़की आग, 2 बच्चों समेत 5 घायल     |   आज आएंगे पांच विधानसभा और एक लोकसभा उपचुनाव के नतीजे     |  

उत्तराखंड में देवदार पेड़ों के संरक्षण और नए पौधे लगाने की मुहिम

उत्तराखंड के जंगलों में पिछले दिनों कई बार आग लगने की खबरें आई हैं, अब वन विभाग यहां के पहाड़ी जंगलों में भारी संख्या में देवदार के पौधे लगाने की मुहिम चला रहा है।

राज्य वन विभाग देवदार के नए पौधे लगाने के साथ-साथ मौजूदा पेड़ों के संरक्षण के लिए भी कदम उठा रहा है। डीएफओ दिगंत नायक ने कहा कि “देवदार को प्रोटेक्ट करने के लिए बहुत सारे स्कीम्स चल रहे हैं। साथ-साथ देवदार को ये भी कहा जाता है कि जो फॉरेस्ट फायर बचाने के लिए देवदार के वृक्ष को और बढ़ाने का बहुत आवश्यकता है, क्योंकि चेरपाइन जंगल में आग ज्यादातर लगती है। अगर इसको हम कंवर्ट करके देवदार फॉरेस्ट बना दें तो फॉरेस्ट फायर भी कम लगेगा और इसके प्रयास में पूरा विभाग जुटा है।”

यहां के लोगों में देवदार के पेड़ों का खास महत्व है। मान्यताओं के मुताबिक यह देवताओं का आशीर्वाद है, डीएसबी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. ललित तिवारी ने कहा कि

“उत्तराखंड में अगर हम बात करते हैं जंगलों में एक ऐसा पौधा है, ऐसा एक पेड़-पौधा है जिसमें देवताओं का वास माना जाता है। इसीलिए इसको देवताओं का वृक्ष भी माना जाता है। और साथ ही इसमें शिवजी की अपार कृपा भी मानी जाती है। लगभग 3200 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है ये देवदार और इस शंकूधारी जो इसका शेप है, वो शंकूधारी होता है। और उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और तिब्बत में भी ये मिलता है।”

धार्मिक महत्व और लकड़ी के कई उपयोगों के अलावा देवदार में कई औषधीय गुण भी होते हैं, इससे निकाला गया तेल सुगंध चिकित्सा के काम आता है।