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अमृत 2.0 से यूपी के शहरों में पेयजल और सीवरेज परियोजनाओं को रफ्तार, 637 परियोजनाओं को मंजूरी

उत्तर प्रदेश के शहरों में पेयजल, सीवरेज, जल संरक्षण और हरित क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत बड़े स्तर पर काम चल रहा है। योजना के तहत प्रदेश में करीब 29,716 करोड़ रुपये की 637 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 114 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 453 परियोजनाओं पर काम तेजी से चल रहा है।

अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन यानी अमृत 2.0 वर्ष 2021 से 2026 तक संचालित है। इसके तहत प्रदेश के 762 नगरीय निकायों और 60 अमृत शहरों को शामिल किया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी परिवारों को नल से शुद्ध पेयजल, सीवर कनेक्शन और बेहतर पर्यावरणीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

637 परियोजनाओं पर 29,716 करोड़ रुपये खर्च

अमृत 2.0 के तहत प्रदेश में कुल 637 परियोजनाओं के लिए 29,716.29 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इनमें से 612 परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 567 परियोजनाओं की निविदाएं भी स्वीकृत की जा चुकी हैं। 114 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 453 पर काम जारी है।

पेयजल और सीवरेज पर सबसे ज्यादा जोर

अमृत 2.0 के तहत पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पेयजल से जुड़ी 437 परियोजनाओं के लिए 18,829 करोड़ रुपये और 41 सीवरेज परियोजनाओं के लिए 10,124 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहरों में पेयजल आपूर्ति, सीवर कनेक्शन और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार में मदद मिलेगी।

190 सरोवरों का होगा पुनर्जीवन

शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार के लिए 403.45 करोड़ रुपये की लागत से 190 सरोवर पुनर्जीवन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही 89.76 करोड़ रुपये की लागत से 1,777 हरित भूमि और पार्क परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। योजना के तहत एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले सरोवरों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे शहरों में जल सुरक्षा बढ़ाने के साथ हरित क्षेत्रों के विस्तार में मदद मिलने की उम्मीद है।

नागरिक सुविधाओं और पर्यावरण सुधार पर फोकस

यूपी जल निगम (नगरीय) के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर ने कहा कि अमृत 2.0 के तहत प्रदेश के शहरों में पेयजल और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने पर जोर है। सरोवरों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और हरित क्षेत्रों के विकास से शहरी क्षेत्रों में जल सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।