योगी सरकार ने किसानों को भूमि विवादों से राहत दिलाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए चकबंदी से जुड़े लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं, वर्षों से लंबित मामलों को निपटाने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने अधिकारियों को लंबित मामलों का प्राथमिकता से निस्तारण करने को कहा है। सरकार का उद्देश्य किसानों को जमीन से जुड़े विवादों से राहत दिलाना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली परेशानियों को कम करना है।
वर्षों से लंबित चकबंदी मामलों में तेजी
प्रदेश के कई गांवों में लंबे समय से चकबंदी की प्रक्रिया अटकी हुई थी। उन्नाव के अजगवां, पिडना और सादाबाद सहित बरेली के मगरासा गांव में करीब 12 वर्षों से चकबंदी लंबित थी। वहीं, बुलंदशहर के बराल गांव में सात वर्ष और बांदा के काजीपुर (गिरवां) गांव में दो वर्ष से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
ग्राम विकास योजनाओं के तहत कार्य, नदी के कटान, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने और आपसी विवादों जैसी वजहों से इन गांवों में प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाइयां आ रही थीं। इन परिस्थितियों को देखते हुए चार जिलों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है।
आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी
योगी सरकार के प्रयासों से आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इनमें महराजगंज का बैसार गांव शामिल है, जहां 18 वर्षों से चकबंदी चल रही थी। बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में भी 12 वर्षों से लंबित प्रक्रिया पूरी की गई है।
इसके अलावा बस्ती के औराडीहा और प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से चल रही चकबंदी की प्रक्रिया समाप्त की गई। इन गांवों में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 52(1) के तहत कार्रवाई की गई है।
15 अक्टूबर से एक महीने तक चलेगा विशेष अभियान
चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के लंबित मामलों का निस्तारण किया जाएगा।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित समय-सीमा से अधिक अवधि का कोई भी निर्विवाद मामला लंबित न रहे। अभियान के बाद भी ऐसे मामले लंबित मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन साल से पुराने मामलों का प्राथमिकता से होगा निस्तारण
चकबंदी न्यायालयों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। इसके लिए उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
इसके साथ ही अधिकारियों को अपने न्यायालयों, अधीनस्थ कार्यालयों और चकबंदी अभिलेखों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण संबंधी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी। सरकार की इस पहल से भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी आने और किसानों को चकबंदी संबंधी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है।