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योगी सरकार का बच्चों की सुरक्षा पर फोकस, गुमशुदा बच्चों की वापसी के बाद भी होगी काउंसलिंग

बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में योगी सरकार का फोकस अब केवल उनकी तलाश और परिवार से सुरक्षित पुनर्मिलन तक सीमित नहीं है। सरकार बच्चों की वापसी के बाद उनकी काउंसलिंग, संरक्षण और पुनर्वास पर भी ध्यान दे रही है। बाल हेल्पलाइन 1098 के जरिए संकट में फंसे बच्चों तक मदद पहुंचाने के साथ उनकी भावनात्मक सुरक्षा और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

गुमशुदगी या किसी संकट की स्थिति से गुजरने वाले बच्चों पर मानसिक और भावनात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में बच्चे की स्थिति और जरूरत का आकलन कर उसे आवश्यक काउंसलिंग, संरक्षण और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य परिवार में वापसी के बाद बच्चों को सामान्य जीवन में लौटने के लिए जरूरी भावनात्मक सहारा देना है।

7 महीने में 51 हजार से ज्यादा मामलों का निस्तारण

आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 1 अगस्त 2026 तक बाल हेल्पलाइन पर बच्चों से संबंधित कुल 55,791 मामले प्राप्त हुए। इनमें से 51,402 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। इनमें बच्चों के गुम होने से संबंधित करीब 19,811 मामले शामिल रहे, जिनमें 18,230 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। वहीं, बच्चों के मिलने से संबंधित 8,714 मामले हेल्पलाइन तक पहुंचे, जिनमें 8,335 मामलों का समाधान किया गया। सरकार का जोर बच्चों को तलाशने और परिवार तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर भी है।

बच्चों की समस्याओं तक पहुंचने का माध्यम बनी 1098

बाल हेल्पलाइन 1098 बच्चों की समस्याओं को सुनने और उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। हेल्पलाइन पर गुमशुदगी के अलावा बच्चों से जुड़ी अन्य समस्याओं की सूचनाएं भी प्राप्त होती हैं। मामलों में संबंधित विभागों और संस्थाओं के समन्वय से आवश्यक कार्रवाई की जाती है। साथ ही शिकायतों की प्रगति पर नजर रखते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।

सुरक्षित बचपन के साथ सुरक्षित भविष्य पर जोर

महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। गुमशुदा बच्चों से संबंधित हर सूचना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की तलाश और सुरक्षित वापसी के साथ परिवार से पुनर्मिलन, काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बच्चे सुरक्षित बचपन के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।