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नशे और रफ्तार में पलटी थी कार, दो युवकों की गई थी जान...

साल 2018 में नशे और रफ्तार के चलते दो युवकों की मौत मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने क्षतिग्रस्त कार का 10 लाख रुपये बीमा दिलाने की मांग को खारिज कर दिया। याचिका 19 जून 2019 को दाखिल हुई थी। याचिकाकर्ता की मांग थी कि उन्हें लगभग 10 लाख रुपये का बीमा 18 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ दिलाया जाए। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के एक लाख और मुकदमा खर्च के 20 हजार रुपये भी अलग से दिए जाएं।

उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पुष्पेंद्र खरे की बेंच ने सात दिसंबर को याचिका खारिज कर दिया। आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा दावा निरस्त करने के फैसले को सही ठहराया है, जिसके मुताबिक कार का बीमा इसलिए नहीं दिया गया था कि नशे में धुत होकर ड्राइविंग की जाए। बीमा देते समय सेवा-शर्तों में स्पष्ट उल्लेख होता है कि चालक पर किसी प्रकार के नशे का प्रभाव होने पर बीमा दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।