उत्तराखंड सरकार ने सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि डॉक्टरों का स्टाइपेंड करीब 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये से अधिक प्रति माह कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने रविवार को बनबसा में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट बैठक में करीब 25 से 26 अहम फैसले लिए गए।
क्लास बी जमीन के नियमितीकरण की समयसीमा बढ़ी
सीएम धामी ने बताया कि देहरादून, लालकुआं और बिंदुखत्ता समेत प्रमुख क्षेत्रों में ‘क्लास बी’ जमीन के नियमितीकरण की समयसीमा को एक साल के लिए बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि बैठक में राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
चारधाम यात्रा और कैंची धाम की व्यवस्थाओं पर चर्चा
कैबिनेट बैठक में चारधाम यात्रा के दौरान यातायात और यात्रा व्यवस्था को सुचारु रखने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा मार्गों पर सड़कें बेहतर स्थिति में रहें और यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
इसके अलावा कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यातायात प्रबंधन पर भी चर्चा हुई। बैठक में ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
7 अक्टूबर को होंगे पीएम मोदी के 25 साल के शासन से जुड़े कार्यक्रम
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 7 अक्टूबर को राज्य के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ‘आदर्श चंपावत’ की सोच के साथ क्षेत्र के विकास पर काम कर रही है। बनबसा और टनकपुर समेत दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों तक सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में लोगों से सीधे संवाद पर जोर
सीएम धामी ने बताया कि बनबसा क्षेत्र में सैन्य छावनी के साथ बड़ी संख्या में बीएसएफ जवान भी तैनात हैं। यह इलाका नेपाल की सीमा से लगा है और दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की संस्कृति और पूजा-पद्धतियों में भी काफी समानता है। सरकार ने बड़े राज्य स्तरीय फैसलों से पहले स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करने की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि फैसलों में जनता की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। यह पहली बार है जब उत्तराखंड की कैबिनेट बैठक राजधानी देहरादून से बाहर बनबसा में आयोजित की गई है।