बिहार में बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को 112.14 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए यह रकम 1,60,201 बाढ़ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में भेजी गई। प्रत्येक परिवार को 7,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। सरकार के मुताबिक, अब तक बिहार में कुल 10,37,391 बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद दी जा चुकी है। इन परिवारों के बीच कुल 726.17 करोड़ रुपये की राहत राशि वितरित की गई है।
बाढ़ से हुए नुकसान की समीक्षा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 6 अक्टूबर को राज्य में बाढ़ की स्थिति और उससे हुए नुकसान की समीक्षा की थी। लोक सेवक आवास के ‘संकल्प’ सभागार में हुई बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद नितिन नवीन भी मौजूद रहे।
बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने मुख्यमंत्री को बाढ़ के कारणों और राज्य में दो चरणों में बनी स्थिति की जानकारी दी। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने बाढ़ के दौरान चलाए गए राहत और बचाव कार्यों का ब्योरा दिया।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि बाढ़ के पहले चरण में गंगा, सोन, घाघरा, कोसी और पुनपुन नदियों का जलस्तर पिछले रिकॉर्ड से ऊपर पहुंच गया था। वहीं, दूसरे चरण में अत्यधिक बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर चार स्थानों पर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर दर्ज किया गया।
पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सारण जिलों में छह स्थानों पर तटबंधों को नुकसान पहुंचा। इन घटनाओं के कारण प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों की जरूरत बढ़ गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस साल गंगा, गंडक और सोन नदियों में पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक पानी आने से बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी। उन्होंने नदी तल में गाद जमा होने को भी बाढ़ के प्रमुख कारणों में से एक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने गाद प्रबंधन के लिए नीति बनाई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नदियों की मौजूदा स्थिति और बाढ़ से हुए नुकसान पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया। उन्होंने नुकसान की विस्तृत प्रारंभिक रिपोर्ट जल्द तैयार कर सौंपने को कहा, ताकि प्रभावित इलाकों में राहत, पुनर्वास और जरूरी विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।