उत्तराखंड में शासन को दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में राज्य कैबिनेट की बैठक हुई। यह चंपावत जिले में पहली बार आयोजित कैबिनेट बैठक थी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब कैबिनेट की बैठकें केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी। राज्य के अलग-अलग जिलों में भी कैबिनेट बैठकें आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय जरूरतों को सीधे सरकार के सामने रखने का मौका मिलेगा।
सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर जोर
सीएम धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच की दूरी को कम करना है, ताकि विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं हैं, बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और विकास से भी जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। इन इलाकों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जा रहा है।
स्थानीय समस्याओं पर तेजी से होंगे फैसले
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग जिलों में कैबिनेट बैठक आयोजित करने से सरकार को स्थानीय परिस्थितियों, जनता की अपेक्षाओं और विकास की जरूरतों को करीब से समझने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र विशेष से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी और जल्द फैसले लेने का रास्ता भी साफ होगा।
सीएम धामी को भेंट की गई पारंपरिक फर्रा/छंतोली
बनबसा में कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्रिमंडल के सदस्यों को उत्तराखंड की लोक परंपरा का प्रतीक पारंपरिक फर्रा/छंतोली भेंट की गई। यह पारंपरिक ढाल चंपावत की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा से जुड़ी हुई है। इसे मुख्य रूप से बांस या रिंगाल की पट्टियों से छतरी के आकार में तैयार किया जाता है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों को फर्रा/छंतोली भेंट करना सीमावर्ती क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपराओं और उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के सम्मान का प्रतीक रहा।