उत्तर प्रदेश में न्यूट्रास्यूटिकल्स, हेल्थ सप्लीमेंट्स, विशेष आहार और विशेष चिकित्सा उद्देश्य वाले खाद्य उत्पादों के निर्माण और कारोबार को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन उत्पादों से जुड़े सभी कारोबारकर्ताओं को अपने कारोबार और उत्पाद की श्रेणी के अनुसार एफएसएसएआई लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। निर्माण, री-लेबलिंग, री-पैकिंग, आयात, वितरण और बिक्री में संबंधित खाद्य श्रेणी के नियमों का पालन करना होगा।
दवाओं से अलग रखनी होगी उत्पाद की श्रेणी
विभाग ने कहा है कि न्यूट्रास्यूटिकल्स और अन्य हेल्थ सप्लीमेंट्स को दवाओं से अलग श्रेणी में रखा जाना चाहिए। उत्पाद की संरचना और उपयोग ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे वह दवा की श्रेणी में आए। इन उत्पादों में हार्मोन, स्टेरॉयड, मादक पदार्थ, मन:प्रभावी पदार्थ और कृत्रिम औषधीय सक्रिय अवयव का इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
निर्धारित सामग्री का ही इस्तेमाल
न्यूट्रास्यूटिकल्स में एफएसएसएआई की निर्धारित अनुसूचियों के तहत अनुमन्य सामग्री का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। इनमें विटामिन, खनिज, अमीनो एसिड, पौधे एवं वनस्पतियां, अणु, अर्क, प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक शामिल हैं। निर्माताओं को अर्क अनुपात, दैनिक उपयोग सीमा, इस्तेमाल किए गए सॉल्वेंट, सक्रिय संकेतक और मानकीकरण से जुड़े तकनीकी दस्तावेज भी उपलब्ध रखने होंगे।
स्वास्थ्य लाभ के दावों के लिए मंजूरी जरूरी
किसी उत्पाद के विशेष स्वास्थ्य लाभ का दावा करने के लिए खाद्य प्राधिकरण की मंजूरी जरूरी होगी। वहीं, एफएसएसएआई की स्वीकृत सूची में शामिल नहीं होने वाले नए अवयव, वनस्पति अर्क या अणु के इस्तेमाल के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत मंजूरी लेनी होगी। ऐसे उत्पादों को गैर-निर्दिष्ट खाद्य की श्रेणी में मंजूरी प्राप्त करनी होगी और इसके लिए एफएसएसएआई के ई-पास पोर्टल पर आवेदन करना होगा।
विटामिन और खनिज की मात्रा की सीमा तय
न्यूट्रास्यूटिकल्स में विटामिन और खनिज की मात्रा एफएसएसएआई तथा आईसीएमआर-एनआईएन की निर्धारित 100 प्रतिशत अनुशंसित दैनिक मात्रा की सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। दैनिक सेवन की गणना केवल एक टैबलेट या कैप्सूल के आधार पर नहीं, बल्कि दिनभर में ली जाने वाली कुल मात्रा के आधार पर की जाएगी।
विशेष चिकित्सा खाद्य उत्पादों के लिए अलग नियम
विशेष चिकित्सा उद्देश्य वाले खाद्य उत्पाद मरीजों के लिए तैयार किए जाने वाले पोषण संबंधी फॉर्मूलेशन हैं। इनका इस्तेमाल डॉक्टर या क्लिनिकल डाइटिशियन की निगरानी में किया जाना चाहिए और इनके निर्माण के लिए खाद्य प्राधिकरण की मंजूरी जरूरी होगी। इन उत्पादों पर अनुशंसित सेवन की मात्रा लिखना अनिवार्य होगा। साथ ही ऐसे उत्पादों का आम जनता के बीच विज्ञापन नहीं किया जा सकेगा। खिलाड़ियों के लिए बनाए गए विशेष आहार उत्पादों में विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) द्वारा प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
लेबल पर जरूरी चेतावनियां लिखना अनिवार्य
न्यूट्रास्यूटिकल्स, हेल्थ सप्लीमेंट्स, विशेष आहार और विशेष चिकित्सा उद्देश्य वाले खाद्य उत्पादों के लेबल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर जरूरी घोषणाएं और चेतावनियां स्पष्ट रूप से लिखनी होंगी। इनमें “औषधीय उपयोग के लिए नहीं”, “अनुशंसित दैनिक मात्रा से अधिक न लें”, लक्षित आयु वर्ग, सेवन संबंधी निर्देश और बच्चों की पहुंच से दूर रखने जैसी चेतावनियां शामिल हैं। विशेष चिकित्सा उद्देश्य वाले उत्पादों पर चिकित्सकीय सलाह के तहत इस्तेमाल की चेतावनी भी देनी होगी।
बीमारी ठीक करने के दावे पर रोक
एफएसडीए ने स्पष्ट किया है कि न्यूट्रास्यूटिकल्स के विज्ञापन में बीमारी को रोकने, ठीक करने, उपचार करने या बीमारी के प्रभाव को कम करने जैसे दावे नहीं किए जा सकेंगे। पोषक तत्वों की मात्रा, संरचना और कार्य से जुड़े तथा एफएसएसएआई द्वारा स्वीकृत दावे ही निर्धारित नियमों के अनुसार किए जा सकेंगे। ये नियम डिजिटल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स और विज्ञापन अभियानों पर भी लागू होंगे।
गुणवत्ता जांच और रिकॉर्ड रखना जरूरी
तैयार उत्पादों में सक्रिय अवयवों, सूक्ष्मजीवीय मानकों और सीसा, पारा, कैडमियम व आर्सेनिक जैसी भारी धातुओं की जांच एफएसएसएआई से मान्यता प्राप्त एनएबीएल प्रयोगशालाओं से करानी होगी। इकाइयों को कच्चे माल के प्रत्येक बैच का विश्लेषण प्रमाणपत्र, बैच निर्माण रिकॉर्ड, अनुमोदित आपूर्तिकर्ताओं की सूची और पूरी सप्लाई चेन का रिकॉर्ड रखना होगा।
असुरक्षित बैच को तुरंत बाजार से हटाना होगा
न्यूट्रास्यूटिकल्स इकाइयों को उत्पाद वापसी और बैच की पहचान की प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी। किसी बैच को असुरक्षित पाए जाने पर उसे तत्काल बाजार से वापस लिया जा सकेगा। इसके लिए डिजिटल स्तर पर भी उत्पाद वापसी की योजना और दस्तावेज तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
आयातित उत्पादों के लिए भी मंजूरी जरूरी
आयातित पदार्थों, उत्पादों और अवयवों को सीमा शुल्क से बाहर निकालने के लिए एफएसएसएआई की आयात मंजूरी प्रणाली के जरिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना होगा। दोहरी उपयोग वाली संरचना के मामलों में यह सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की मंजूरी या एनओसी भी जरूरी होगी कि उत्पाद दवा की श्रेणी में नहीं आता। इसके अलावा विदेशी स्वामित्व या नियंत्रण वाली कंपनियों को भारतीय जैव संसाधनों, खासकर भारतीय वनस्पतियों, का व्यावसायिक न्यूट्रास्यूटिकल निर्माण में इस्तेमाल करने से पहले राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) से आवश्यक मंजूरी या अनुमति प्राप्त करनी होगी।