आगरा की जरी-जरदोजी, अमरोहा के मसाले, अयोध्या की हर्बल चाय, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, कन्नौज का इत्र, गोरखपुर की टेराकोटा ज्वेलरी और बनारस के कालीन... उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों में महिलाओं के हाथों तैयार हो रहे ये उत्पाद अब स्थानीय बाजार से निकलकर बड़े बाजार तक पहुंच रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में प्रदेश के सभी 75 जिलों से स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमी अपने उत्पादों के साथ पहुंची हैं। यहां अलग-अलग जिलों की महिलाओं ने अपने पारंपरिक हुनर और स्थानीय उत्पादों को एक ही मंच पर प्रदर्शित किया है।
हर स्टॉल में दिख रही गांव के हुनर की कहानी
ट्रेड शो में सिर्फ उत्पादों की बिक्री नहीं हो रही, बल्कि हर स्टॉल के साथ एक गांव, एक परंपरागत कला और उसे कारोबार में बदलने वाली महिला की कहानी भी सामने आ रही है।
आगरा की रहनुमा जरी-जरदोजी के उत्पाद लेकर पहुंची हैं, जबकि अमरोहा की कौशल्या गौतम के पिसे मसाले लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। अयोध्या की रेणु सिंह हर्बल चाय और लेमन ग्रास के उत्पाद लेकर आई हैं। आजमगढ़ की रीता प्रजापति ब्लैक पॉटरी प्रदर्शित कर रही हैं। कन्नौज की तारावती इत्र और वाराणसी की सीता देवी कालीन, फुटमैट और रनर के जरिए बनारस के हुनर को बाजार तक पहुंचा रही हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी इन महिलाओं के लिए यह भागीदारी सिर्फ प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। उन्हें उत्पाद बेचने के साथ ग्राहकों की पसंद समझने, पैकेजिंग और प्रस्तुति को बेहतर बनाने तथा बड़े बाजार में अपने उत्पाद की संभावनाएं तलाशने का अवसर भी मिल रहा है।
हर जिले का अपना अलग हुनर
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में उत्पादों की विविधता ट्रेड शो में साफ दिखाई दे रही है। कहीं पारंपरिक शिल्प बाजार में जगह बना रहा है तो कहीं महिलाओं ने रोजमर्रा की जरूरत के उत्पादों को अपने कारोबार का आधार बनाया है।
गोरखपुर की सरोज पाल टेराकोटा ज्वेलरी लेकर आई हैं। सहारनपुर की सुधा सैनी लकड़ी के हस्तशिल्प और खिलौने प्रदर्शित कर रही हैं। प्रयागराज की तब्बसुम मकसूद मूंज से टोकरी, डलिया और सजावटी सामान तैयार करती हैं। प्रतापगढ़ की प्रज्ञा जायसवाल आंवला-मुरब्बा और आम का अचार लेकर पहुंची हैं। महोबा की रानी के स्टॉल पर पीतल की मूर्तियां और अन्य शिल्प उत्पाद हैं।
सिद्धार्थनगर की सरोज देवी ने केले के रेशे से बनाना फाइबर उत्पाद तैयार किए हैं। सोनभद्र की मधुबाला हर्बल साबुन, शहद, फिनाइल और जूट बैग लेकर आई हैं। वहीं खीरी की शफीका जूते, चप्पल और बेल्ट जैसे उत्पाद प्रदर्शित कर रही हैं।
चित्रकूट की प्रिया सिंह लकड़ी के खिलौने, बुलंदशहर की शाहजहां खुर्जा पॉटरी, मथुरा की रेखा टेराकोटा और मिट्टी के उत्पाद तथा ललितपुर की लीला देवी गोमय उत्पाद लेकर ट्रेड शो में पहुंची हैं।
जूट से जरी और मूंज से बनाना फाइबर तक
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक ट्रेड शो में महिला समूहों की उद्यमशीलता केवल पारंपरिक हस्तशिल्प तक सीमित नहीं है। यहां जूट बैग, जरी साड़ी, चिकनकारी, हैंडलूम, कालीन, लकड़ी के खिलौने, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, शहद, मसाले, अचार-मुरब्बा, हर्बल उत्पाद और घरेलू उपयोग के सामान भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
चंदौली की अंजू जरी-जरदोजी सिल्क, बनारसी साड़ी, सूट और दुपट्टे लेकर आई हैं। बाराबंकी की शशि माला चिकनकारी और आर्टिफिशियल आभूषण, रायबरेली की रूबी बानो हैंड ब्लॉक प्रिंट के सूट, साड़ी और दुपट्टे तथा मऊ की माधुरी देवी सिल्क साड़ी प्रदर्शित कर रही हैं।
वहीं बलिया की रंजना देवी फिनाइल, टॉयलेट क्लीनर, डिशवॉश और हैंडवॉश जैसे उत्पाद लेकर आई हैं। जौनपुर की सुषमा सिंह भी क्लीनिंग उत्पादों के साथ मौजूद हैं। मुजफ्फरनगर की दीपिका साबुन, सर्फ और हर्बल तेल तथा कौशाम्बी की शिमला देवी कुशवाहा अचार, देसी घी, क्लीनर और हैंडवॉश जैसे उत्पाद लेकर पहुंची हैं।
बिक्री के साथ बाजार को समझने का मौका
स्वयं सहायता समूहों के लिए उत्पाद तैयार करना कारोबार की पहली सीढ़ी है। इसके बाद ग्राहकों और बड़े बाजार तक पहुंच बनाना एक बड़ी चुनौती होती है। इंटरनेशनल ट्रेड शो इस दूरी को कम करने का मंच बन रहा है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, महिला उद्यमियों के लिए उत्पाद तैयार करने के साथ उन्हें बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी है। ट्रेड शो में अलग-अलग जिलों के उत्पाद एक मंच पर आने से महिलाओं को खरीदारों और ग्राहकों तक सीधे पहुंचने का अवसर मिल रहा है।
बड़े आयोजन में ग्राहकों के बीच पहुंचकर महिला उद्यमी यह भी समझ पा रही हैं कि बाजार में किस तरह के उत्पादों की मांग है, पैकेजिंग और प्रस्तुति में क्या बदलाव किए जा सकते हैं और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार के अनुरूप कैसे तैयार किया जा सकता है।
चार क्षेत्रों में दिखा यूपी का हुनर
पश्चिमी यूपी: बागपत की दरी और हैंडलूम चादर, बुलंदशहर की खुर्जा पॉटरी, सहारनपुर का लकड़ी हस्तशिल्प और मेरठ के नेचुरल फूड।
अवध: अयोध्या की हर्बल चाय और लेमन ग्रास उत्पाद, लखनऊ का हैंडलूम, बाराबंकी की चिकनकारी और आर्टिफिशियल आभूषण।
पूर्वांचल: आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, गोरखपुर की टेराकोटा ज्वेलरी, वाराणसी का कालीन और मऊ की सिल्क साड़ी।
बुंदेलखंड: चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने, महोबा की पीतल मूर्तियां और झांसी का हस्तनिर्मित सजावटी सामान।
प्रदेश के 75 जिलों से आईं महिला उद्यमियों की मौजूदगी ने यूपीआईटीएस में ग्रामीण उत्पादों को बड़े बाजार के सामने लाने का अवसर दिया है। इन स्टॉलों के जरिए स्थानीय शिल्प, खानपान, घरेलू उत्पाद और महिलाओं की उद्यमशीलता एक ही मंच पर दिखाई दे रही है।