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तिब्बत का यमद्वार - मृत्यु का रहस्मय प्रवेशद्वार

दुनिया के सबसे रहस्यमय स्थानों में से एक है "तिब्बत का यमद्वार"। इसे तिब्बती में "चोर्टेन कांग नग्यी" कहा जाता है। यह द्वार तिब्बत में दारचेन से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हिंदू धर्म में इसका अर्थ "मृत्यु का द्वार" होता है। संस्कृत में "यम" का अर्थ है मृत्यु के देवता और "द्वार" का मतलब है प्रवेश। यह स्थान तिब्बत में मानसरोवर झील और कैलाश पर्वत यात्रा के दौरान आता है, और इसे माउंट कैलाश का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। यही वह स्थान है जहां से कैलाश की परिक्रमा आरंभ होती है। पौराणिक मान्यता है कि यह वही स्थान है, जहां से प्राण त्यागने के बाद आत्मा यमलोक के मार्ग पर जाती है। इसलिए इसे "यमद्वार" कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी यहां से गुजरता है, उसे अपनी मृत्यु का अनुभव होता है और जीवन की घटनाएं उसकी आंखों के सामने घूमने लगती हैं।

यह भी मान्यता है कि यहां से आगे केवल वही जा सकता है जिसे भीतर से "बुलावा" मिलता है। बहुत से लोगों का मानना है कि भगवान शिव स्वयं यहीं पर भक्तों की परीक्षा लेते हैं। इसलिए कई यात्री यहां पहुंचकर आगे नहीं बढ़ पाते, जैसे उनकी आत्मा तैयार न हो। यह द्वार दिखने में साधारण पत्थर का एक ढांचा है, लेकिन इसमें एक अलौकिक ऊर्जा महसूस होती है। यहां पहुंचते ही कई यात्रियों ने अजीब सी ऊर्जा, कंपन, बेचैनी, डर और शांति का अनुभव किया है।

ऐसा माना जाता है कि कुछ लोग यहां रोने लगते हैं, तो कुछ एकदम शांत हो जाते हैं मानो आत्मा अपने पुराने कर्मों से सामना कर रही हो। कुछ लोग इसे रहस्यमय मानते हैं और कुछ धार्मिक। लेकिन एक बात तय है यह द्वार सिर्फ एक प्रवेश द्वार नहीं है, बल्कि आत्मा और चेतना से जुड़ने का स्थान है, जहां हर व्यक्ति को कभी न कभी खुद से सामना करना ही पड़ता है।