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किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च स्थगित, शंभू बॉर्डर पर क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं किसान?

पंजाब और हरियाणा से दिल्ली मार्च पर निकले किसानों को पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर रोक लिया। जिसके बाद किसानों और पुलिस के बीच जमकर टकराव देखने को मिला। हरियाणा पुलिस ने किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी किसान घायल हो गए। जिसके बाद किसानों ने आठ दिसंबर तक अपना दिल्ली चलो मार्च स्थगित कर दिया।  

केंद्र सरकार के सामने अपनी प्रमुख कृषि मांगों को लेकर 101 किसानों के समूह ने पंजाब हरियाणा के शंभू बॉर्डर से दिल्ली मार्च शुरू किया था। इससे पहले शुक्रवार को भी पुलिस के साथ हुए टकराव के बाद किसानों को अपना प्रदर्शन स्थगित करना पड़ा था। क्योंकि पुलिस के साथ टकराव में कई किसान घायल हो गए थे। 

जिन प्रमुख मांगों के लिए किसान आंदोलन कर रहे हैं उनमें एमएसपी की गारंटी 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम की बहाली और 2021-22 के आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा, वे कर्ज माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, आंदोलनों के दौरान हुई एफआईआरों को वापस लेने और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की भी मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी देना नहीं चाहती है क्योंकि सरकार का मानना ​​है कि इससे पूरी उपज की खरीद असंभव हो जाएगी। सुरक्षा बलों की तरफ से दिल्ली मार्च रोके जाने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान इस साल 13 फरवरी से ही पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डरों पर डेरा डाले हुए हैं।