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पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे से 7.8 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी, पुलिस ने चार करोड़ रुपये ‘फ्रीज’ कराए

नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) साइबर जालसाज़ों ने राज्यसभा के पूर्व सदस्य नरेश गुजराल की पहचान का इस्तेमाल कर ऑनलाइन ‘मैसेजिंग एप्लिकेशन’ के माध्यम से उनकी कंपनी के वित्तीय कर्मचारियों से 7.8 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

नरेश गुजराल (78) पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे हैं। इंद्र कुमार गुजराल 1997 से 1998 तक भारत के 12वें प्रधानमंत्री रहे थे।

दिल्ली पुलिस के पास मंगलवार को धोखाधड़ी के मामले में एक ई-प्राथमिकी दर्ज कराई गई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।

पुलिस के अनुसार, यह धोखाधड़ी 12 से 16 जून के बीच हुई। इस दौरान, ठगों ने नरेश गुजराल की ‘डिस्प्ले पिक्चर’ (डीपी) का इस्तेमाल करके एक ऑनलाइन ‘मैसेजिंग’ मंच पर अकाउंट बनाया। इसके बाद जालसाज़ों ने उनके एक कर्मचारी को संदेश भेजकर कारोबारी जरूरतों का हवाला देते हुए एक निर्दिष्ट बैंक खाते में ‘रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट’ (आरटीजीएस) के माध्यम से तत्काल धनराशि हस्तांतरित करने का निर्देश दिया।

पुलिस ने बताया कि निर्देशों को सही मानकर कर्मचारी ने चार दिनों में चार बार में आरटीजीएस के जरिए 7.8 करोड़ रुपये, बताए गए खाते में भेज दिए। यह कर्मचारी गुजराल की कंपनी का वित्तीय कामकाज देखता है।

यह ठगी 16 जून को तब सामने आई जब गुजराल की बेटी की नज़र इन लेन-देन पर पड़ी और उन्होंने तुरंत अपने पिता से इस बारे में पुष्टि की।

पुलिस ने बताया कि नरेश गुजराल ने ऐसे कोई भी निर्देश जारी करने से इनकार किया और पैसे भेजने जाने के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कही, जिसके बाद परिवार और कंपनी के कर्मचारियों को एहसास हुआ कि वे धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं।

जांचकर्ताओं ने बताया कि तेज़ी से कार्रवाई करने से अधिकारियों को ठगे गए पैसे में से करीब चार करोड़ रुपये ‘फ्रीज’ कराने में कामयाबी मिली।

जांचकर्ताओं ने बताया कि पैसे को सबसे पहले महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के चार बैंक खातों में भेजा गया था और हर खाते में एक से दो करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए थे।

उन्होंने बताया कि बाद में लगभग 30 से 40 खातों में धनराशि भेजी गई।

नरेश गुजराल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्ट करने से अधिकारियों को ठगी हुई रकम के एक बड़ा हिस्से के लेन-देन पर रोक लगाने में मदद मिली।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी कंपनी और हमारे सीएफओ इस धोखाधड़ी का शिकार हुए थे। मैं शहर से बाहर था और अब भी बाहर हूं। हालांकि, इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि चूंकि हमने साइबर अपराध शाखा को तुरंत इस अपराध की सूचना दी, इसलिए उन्होंने हमें 70 प्रतिशत से ज्यादा रकम वापस पाने में मदद की। अधिकारियों को और भी रकम वापस मिलने की उम्मीद है।’’

भाषा शफीक रंजन

रंजन

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