वाशिंगटन/दुबई, 17 जून (एपी) कई दिनों तक गोपनीयता बनाए रखने के बाद, बुधवार को अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों को ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की जानकारी दी।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार देर रात संकेत दिया कि अमेरिका के साथ समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेज़ेश्कियन हस्ताक्षर कर सकते हैं।
शुक्रवार को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह से पहले, अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर उस मसौदे के बारे में बात की जिसे ईरान ने अभी तक जारी नहीं किया है।
एमओयू के मसौदे के अनुसार, अमेरिका और ईरान, तथा मौजूदा युद्ध में उनके सहयोगी, इस एमओयू पर हस्ताक्षर करके लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने की घोषणा करते हैं। साथ ही, वे यह भी वचन देते हैं कि अब से वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई युद्ध या सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करेंगे, एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी देने से बचेंगे और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सुनिश्चित करेंगे।
इसमें कहा गया कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने तथा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का संकल्प लेते हैं।
मसौदे के मुताबिक, अमेरिका और ईरान अधिकतम 60 दिनों में बातचीत करके अंतिम समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं; आपसी सहमति से इस समय-सीमा को बढ़ाया जा सकता है।
इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होते ही, अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और किसी भी तरह की रुकावट या बाधा को हटाना शुरू कर देगा और 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से खत्म कर देगा।
इस एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद, ईरान पूरी कोशिश करेगा कि वाणिज्यिक जहाज फारस की खाड़ी से ओमान सागर और ओमान सागर से फारस की खाड़ी तक बिना किसी शुल्क के, सुरक्षित रूप से आ-जा सकें। यह सुविधा केवल 60 दिनों के लिए होगी।
इसमें कहा गया कि अमेरिका, क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर की एक निश्चित व आपसी सहमति वाली योजना विकसित करने का काम करेगा।
अमेरिका अंतिम समझौते के तहत तय समय-सीमा में ईरान के खिलाफ सभी तरह के प्रतिबंध हटाने का वादा करता है। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव, आईएईए बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के प्रस्ताव और अमेरिका के सभी एकतरफा प्रतिबंध (प्राथमिक और माध्यमिक) शामिल हैं।
ईरान फिर से यह बात दोहराता है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और न ही उनका विकास करेगा। अमेरिका और ईरान इस बात पर सहमत हुए हैं कि वे जमा की गयी संवर्धित सामग्री के निपटान के मामले को एक ऐसी प्रक्रिया के जरिए सुलझाएंगे जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों। यह प्रक्रिया पैराग्राफ-7 में बताए गए शेड्यूल के अनुसार होगी और इसमें आईएईए की देखरेख में साइट पर ही अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को कम-संवर्धित (डाउनब्लेंड) की न्यूनतम कार्यप्रणाली अपनाई जाएगी।
समझौते के तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम में यथास्थिति बनाए रखेगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही इस क्षेत्र में अतिरिक्त सेना तैनात करेगा।
इस एमओयू पर हस्ताक्षर होते ही और प्रतिबंध खत्म होने तक, अमेरिका ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे बनी चीज़ों और इनसे जुड़ी सभी सेवाओं (जैसे बैंकिंग लेन-देन, बीमा, परिवहन आदि) के निर्यात के लिए तत्काल छूट जारी करेगा।
अमेरिका इस समझौते के लागू होने पर ईरान के ‘फ्रीज’ किए गए या प्रतिबंधित कोष और संपत्ति को इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से उपलब्ध कराने का वचन देता है।
मसौदे के मुताबिक, अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी।
उधर ईरान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेज़ेश्कियन हस्ताक्षर कर सकते हैं।
इस तरह का हस्ताक्षर समारोह दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिनके बीच 1980 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास में बंधक संकट के बाद राजनयिक संबंध टूट गए थे।
ईरानी सरकारी टेलीविजन ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई के हवाले से यह टिप्पणी की।
पेज़ेश्कियन पश्चिम के साथ बेहतर संबंध बनाने के वादे के साथ राष्ट्रपति बने थे। हालांकि, जनवरी में प्रदर्शनकारियों की बड़े पैमाने पर हत्या और युद्ध के बाद उन्हें महीनों तक हाशिये पर रखा गया था, क्योंकि देश की धर्म-आधारित शासन व्यवस्था की बागडोर कट्टरपंथियों ने संभाल ली है।
एपी प्रशांत सुरभि
सुरभि