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ईडी ने सीएमआरएल धनशोधन मामले में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री विजयन की बेटी वीणा से नौ घंटे पूछताछ की

कोच्चि, 17 जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन के एक मामले में बुधवार को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी वीणा टी. से नौ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की।

मामला उनकी बंद हो चुकी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी और एक खनन कंपनी सीएमआरएल के बीच कथित संबंधों से जुड़ा हुआ है।

वीणा पूर्वाह्न 10:30 बजे प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेश हुईं और रात लगभग आठ बजे कार्यालय से बाहर निकलीं।

इससे पहले सुबह के समय ईडी दफ्तर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात था, जहां वीणा अपनी गाड़ी से उतरकर सीधे अंदर चली गईं।

एजेंसी ने उन्हें 12 जून को उसकी कोच्चि इकाई के सामने पेश होने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए असमर्थता जताई थी।

उन्हें बंद हो चुकी उनकी आईटी फर्म ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ के लेन-देन से जुड़े प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ पेश होने का निर्देश दिया गया था।

ईडी ने इस मामले में मंगलवार को सीएमआरएल के संस्थापक शशिधरन कार्था के बेटे और पत्नी से पूछताछ की थी। इससे पहले सोमवार को एजेंसी ने इसी मामले में कार्था की बेटी से भी सवाल-जवाब किए थे।

यह जांच उन आरोपों से जुड़ी है जिसमें कहा गया है कि ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड’ (सीएमआरएल) ने बिना कोई सेवा प्राप्त किए एक्सालॉजिक कंपनी को 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

ईडी के अनुसार, सीएमआरएल के प्रबंध निदेशक कार्था द्वारा संचालित एक अन्य कंपनी ‘एम्पॉवर इंडिया कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ ने भी एक्सालॉजिक को 50 लाख रुपये का ऋण दिया था, जबकि कंपनी कथित तौर पर समय पर पुन:भगतान करने में विफल रही थी।

एजेंसी का आरोप है कि वीणा और कार्था के नेतृत्व वाले सीएमआरएल के प्रबंधन ने इन लेन-देन के माध्यम से ‘‘अपराध की आय’’ अर्जित की।

गंभीर धोखाधड़ी अन्वेषण कार्यालय (एसएफआईओ) द्वारा अप्रैल 2025 में एर्नाकुलम की एक अदालत में दायर एक अभियोजन शिकायत के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक मामला दर्ज किया था। मालूम हो कि एसएफआईओ कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की जांच शाखा है।

सीएमआरएल कंपनी जनवरी 2019 में आयकर विभाग के एक छापे के बाद केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर आई थी। उस छापे में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताओं का पता चला था, जिसमें लगभग 130 करोड़ रुपये के कुछ ऐसे खर्च शामिल थे जिनके फर्जी होने का संदेह है।

भाषा जोहेब प्रशांत

प्रशांत