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दिल्ली स्लम एवं झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026 को अंतिम रूप दिया गया: मुख्यमंत्री

नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि केंद्र और दिल्ली सरकार ने 'दिल्ली स्लम एवं झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026' को अंतिम रूप दे दिया है, जिसके तहत पहले चरण में पांच झुग्गी बस्तियों के लिए पुनर्वास परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

गुप्ता ने कहा कि पहले चरण में, नीति के तहत पांच जेजे क्लस्टर के लिए पुनर्वास परियोजनाएं शुरू की जाएंगी और उन्हें स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, खेल के मैदान और आंगनवाड़ी केंद्रों जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

गुप्ता ने मंगलवार देर रात 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि इस नीति को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम रूप दिया गया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) अगले 45 दिनों के भीतर पांच झुग्गी बस्तियों के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करेंगे।

एक अधिकारी के अनुसार, पहले चरण में चिह्नित किए गए क्लस्टर पूर्वी दिल्ली में मयूर विहार, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीलमपुर, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में सुल्तानपुरी, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में लाजपत नगर और उत्तरी दिल्ली में पीतमपुरा में स्थित हैं।

गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार हर महीने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पर आधारित कम से कम पांच पुनर्वास परियोजनाओं के लिए भी निविदाएं जारी करेगी।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पुनर्वास कॉलोनियां बुनियादी नागरिक सुविधाओं से लैस होंगी, जिनमें स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, खेल के मैदान और आंगनवाड़ी केंद्र शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को सम्मानजनक आवास प्रदान करना और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले पात्र निवासियों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण को पूरा करना है।

इस बैठक में केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

यह घोषणा रेस कोर्स क्षेत्र के पास झुग्गी बस्तियों को ध्वस्त करने के प्रस्ताव से जुड़ी कानूनी कार्यवाही के बीच आई है।

केंद्र ने इन बस्तियों से निवासियों को हटाने की मांग की थी और कहा था कि ये बस्तियां एक वायु सेना स्टेशन से सटे संरक्षित क्षेत्र में स्थित हैं।

केंद्र ने तर्क दिया था कि रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा हितों की पूर्ति के लिए अनधिकृत संरचनाओं को हटाना आवश्यक है।

इस महीने के शुरू में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे उन निवासियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करें जिन्होंने अभी तक अपने घर खाली नहीं किए हैं।

अदालत ने सोमवार को कहा कि रेस कोर्स झुग्गी बस्तियों के उन निवासियों के मकानों को एक जुलाई तक ध्वस्त नहीं किया जा सकता, जिन्होंने वैकल्पिक आवास स्वीकार नहीं किया है और वहां से स्थानांतरित नहीं हुए हैं।

भाषा नोमान नोमान माधव

माधव