होशियारपुर, 17 जून (भाषा) जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने बुधवार को यहां विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
यह प्रदर्शन अकाल तख्त द्वारा दो दिन पहले मान को एक आपत्तिजनक वीडियो के मामले में ‘गुरु-दोखी’ (गुरु-द्रोही) और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किए जाने के बाद किया गया।
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था, अकाल तख्त ने सोमवार को मान को ‘गुरु-दोखी’ और ‘खालसा पंथ-विरोधी' घोषित किया था। साथ ही, समुदाय के लोगों से उनके साथ ‘‘हर तरह के संबंध तोड़ने’’ को कहा था। मुख्यमंत्री पर आरोप है कि उन्होंने एक कथित आपत्तिजनक वीडियो के बारे में झूठ बोला, जिससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।
सिख धर्मगुरुओं का कहना है कि उनकी ओर से करवाई गई फोरेंसिक जांच में यह बात सामने आई है कि वायरल क्लिप असली थी और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से नहीं बनाई गई थी, जबकि मान का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं।
'वारिस पंजाब दे' के जिला अध्यक्ष अवतार सिंह सेखों की अगुवाई में प्रदर्शनकारियों ने मान के खिलाफ नारे लगाए और उनका पुतला भी फूंका।
बाद में उन्होंने सहायक आयुक्त के जरिए पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मान के खिलाफ मामला दर्ज करने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नैतिक आधार पर उनके इस्तीफे की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों में शाम चौरासी विधानसभा क्षेत्र के लिए पार्टी के प्रभारी लखबीर सिंह, अकाली दल (वारिस पंजाब दे) की पांच सदस्यीय कमेटी के सदस्य तलविंदर सिंह निज्जर और संगठन के होशियारपुर अध्यक्ष करनैल सिंह लवली शामिल हुए।
नेताओं ने मांग की कि विवादित वीडियो से जुड़े तथ्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर मान के खिलाफ कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि मामले की जांच पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की देखरेख में कराई जाए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए और आपत्तिजनक वीडियो के लिए माफी मांगनी चाहिए।
भाषा सुरभि माधव
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