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माकपा ने ‘पीएमश्री’ योजना को लेकर केरल में सत्तारूढ़ यूडीएफ सरकार पर निशाना साधा

तिरुवनंतपुरम, 17 जून (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने केंद्र की ‘पीएमश्री’ योजना से नहीं हटने संबंधी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के फैसले की बुधवार को कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ सरकार जनता को इस पहल के बारे में गुमराह कर रही है।

वहीं, भाजपा ने माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ दोनों पर राजनीतिक कारणों से ‘प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया' (पीएमश्री) योजना में देरी करने का आरोप लगाया।

इसने दावा किया कि इस देरी के कारण केरल के विद्यार्थियों को शैक्षिक लाभों से वंचित रहना पड़ा है और सरकार योजना के क्रियान्वयन को लेकर विरोधाभासी रुख अपना रही है। केरल सरकार ने बुधवार को संकेत दिया कि वह केंद्र की ‘पीएमश्री’ योजना से बाहर नहीं होगी, बल्कि इस पहल को सशर्त लागू करने की कोशिश करेगी ताकि राज्य को पाठ्यक्रम तय करने की स्वतंत्रता मिल सके।

अपनी अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने यहां प्रेसवार्ता में कहा कि उन्होंने गैर-भाजपा शासित राज्यों के अपने समकक्षों के साथ इस मामले पर चर्चा की है और वे इस योजना को लागू करने के लिए सहमत हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि इस योजना के सभी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए चार मंत्रियों की एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति बनाई गई है।

सतीशन ने इस योजना से पीछे न हटने संबंधी अपने प्रशासन के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि एलडीएफ की पिछली सरकार ने केंद्र के साथ पहले ही एक समझौता कर लिया था और इस पहल के तहत लगभग 99 करोड़ रुपये भी हासिल किए थे।

माकपा के प्रदेश सचिवालय ने एक बयान में कहा कि ‘पीएमश्री’ योजना के क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री की घोषणा ‘‘कांग्रेस और भाजपा के बीच समझौते’’ को उजागर करती है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि केरल का धर्मनिरपेक्ष समाज राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने की अनुमति नहीं देगा, जो संघ परिवार का एजेंडा है।

माकपा ने यूडीएफ नेताओं पर भी इस योजना को लेकर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया।

बयान के अनुसार, सतीशन, के. सी. वेणुगोपाल और पी. के. कुन्हालीकुट्टी समेत नेताओं ने पहले जनता को आश्वासन दिया था कि यदि वे सत्ता में आते हैं तो वे ‘पीएमश्री’ योजना को लागू नहीं करेंगे, लेकिन अब वे इसके क्रियान्वयन का समर्थन कर रहे हैं।

माकपा ने आरोप लगाया कि यूडीएफ ने हाल के विधानसभा चुनाव के दौरान गलत जानकारी फैलाकर ‘पीएमश्री’ मुद्दे का उपयोग करते हुए अल्पसंख्यकों के बीच एलडीएफ के खिलाफ असंतोष पैदा किया था।

पार्टी ने कहा कि यूडीएफ कथित रूप से जनता को गुमराह करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।

वामपंथी दल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर भी अपना विरोध भी दोहराया और आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य पाठ्यपुस्तकों तथा पाठ्यक्रमों का ‘‘भगवाकरण’’ करना है।

इस बीच, मीडिया को संबोधित करते हुए भाजपा नेता के. सुरेंद्रन ने मुख्यमंत्री सतीशन और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर राजनीतिक कारणों से ‘पीएमश्री’ योजना में देरी करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें केरल के विद्यार्थियों से माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि इस देरी के कारण स्कूल बेहतर बुनियादी ढांचे, स्मार्ट कक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और योजना के अन्य लाभों तक पहुंच से वंचित रह गए हैं।

सुरेंद्रन ने सतीशन की इस बात के लिए भी आलोचना की कि उन्होंने पहले ‘पीएम श्री’ योजना का विरोध किया था, लेकिन अब सत्ता में आने के बाद इसे लागू करने का निर्णय ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को लेकर व्यक्त की जा रही चिंताएं भ्रामक हैं और राष्ट्रीय शिक्षा मानक पहले से ही केरल की शिक्षा प्रणाली के कई पहलुओं में परिलक्षित होते हैं।

सुरेंद्रन ने दावा किया कि योजना को चुनिंदा स्कूलों तक सीमित करने से कई विद्यार्थी इसके लाभों से वंचित रह जाएंगे।

भाषा

देवेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल