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राजस्थान में गोडावण पक्षियों की संख्या बढ़कर 94 हुई, तीन चूजे जन्मे

जैसलमेर, 17 जून (भाषा) तीन और चूजों के जन्म से राजस्थान में गोडावण पक्षियों की संख्या बढ़कर 94 हो गई है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

इसके अनुसार जैसलमेर जिले में प्रजनन केंद्रों पर गोडावण के तीन चूजे पैदा हुए हैं। इनमें से दो चूजों का जन्म कृत्रिम गर्भाधान से हुआ जबकि एक चूजा जंगल से सुरक्षित लाए गए अंडे से जन्मा।

गोडावण या ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (जीआईबी) राजस्थान का 'राजकीय पक्षी' घोषित है और यह गंभीर रूप से लुप्तप्राय (क्रिटिकली एंडेंजर्ड) श्रेणी में आता है। इसे बचाने के प्रयासों के तहत साल 2018 में विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया था।

सहायक वन संरक्षक अशोक कुमार ने बताया कि जैसलमेर के सुदासरी और सम ब्रीडिंग सेंटर में इस प्रजाति के संरक्षण का विशेष अभियान शुरू किया गया जिसके परिणाम अब सामने आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'इन केंद्रों पर स्वाभाविक प्रजनन के साथ-साथ जंगल से सुरक्षित लाए गए अंडों का संरक्षण भी किया जाता है। विशेषज्ञों की एक टीम चौबीसों घंटे इस प्रक्रिया पर नजर रखती है और वैज्ञानिक तरीकों से चूजों का पालन पोषण करती है।'

कुमार ने कहा कि जंगल से अंडे लाने से आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे नई पीढ़ी ज़्यादा स्वस्थ और पर्यावरण के हालात के हिसाब से ढलने में सक्षम बनती है।

उन्हें शिकारियों से भी बचाया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रजनन का दौर चल रहा है और आने वाले दिनों में और चूजों को जन्मने की उम्मीद है।

इन पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक और कोशिश के तहत रामदेवरा के पास 6.25 करोड़ रुपये की लागत से 64 मीटर लंबा भूमिगत मार्ग बनाया जा रहा है।

अधिकारियों ने कहा कि गोडावण की बढ़ती संख्या इस विलुप्तप्राय पक्षी के संरक्षण के लिए किए जा रहे वैज्ञानिक और सुनियोजित प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।

भाषा स. पृथ्वी संतोष

संतोष