नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि ‘लैटरल एंट्री’ को स्थगित नहीं किया गया है और सभी हितधारकों के साथ परामर्श जारी है।
‘लैटरल एंट्री’ का अभिप्राय सरकारी विभागों में विशेषज्ञों (जिनमें निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ भी शामिल हैं) की नियुक्ति से है।
लैटरल एंट्री की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘इस प्रक्रिया को स्थगित करने का कोई आदेश नहीं है।’’
मंत्री 'कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की 12 वर्षों की उपलब्धियों' पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
लैटरल एंट्री के तहत भरी जाने वाली रिक्तियों के लिए आरक्षण का प्रावधान न होने को लेकर हुए राजनीतिक विवाद के बीच, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने अगस्त 2024 में सरकारी विभागों में इस प्रक्रिया के माध्यम से अहम पदों पर नियुक्तियां करने के लिए जारी अपना विज्ञापन रद्द कर दिया था।
कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि परामर्श सिर्फ संबंधित मंत्रालयों के साथ ही नहीं, बल्कि (इससे जुड़े) सभी लोगों के साथ भी हो रहा है।
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की सचिव रचना शाह ने बताया कि लैटरल एंट्री तीन चरणों में की गई और अलग-अलग विभागों में 63 अधिकारियों की नियुक्ति की गई।
उन्होंने संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, ‘‘उनमें से दो-तिहाई लोग अभी भी पदस्थ हैं और (विशेषज्ञ के तौर पर) योगदान दे रहे हैं।’’
सचिव ने कहा कि लैटरल एंट्री सरकार की एक अहम पहल है और इस पर नियमित रूप से परामर्श हो रहा है।
साल 2019 से 2023 के बीच लैटरल एंट्री के माध्यम से नियुक्त किये गए 63 विशेषज्ञों में से 35 अनुबंध पर हैं और शेष 28 प्रतिनियुक्ति पर हैं।
भाषा सुभाष पवनेश
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