नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) दिल्ली सरकार ने राजधानी के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए राष्ट्रीय ध्वज को तेज हवाओं और प्रतिकूल मौसम के कारण बार-बार होने वाली क्षति से बचाने के उद्देश्य से अधिक टिकाऊ कपड़े की पहचान करने के लिए एक वैज्ञानिक अध्ययन शुरू कराया है।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बुधवार को कहा कि इंजीनियरों की एक टीम को ऐसे कपड़े के चयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे बना तिरंगा तेज हवाओं का बेहतर ढंग से सामना कर सके और उसे नुकसान से बचाया जा सके।
मंत्री ने कहा कि टीम ध्वज निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पांच प्रकार के कपड़ों का चयन करेगी। इन कपड़ों का बाद में घिसाव, फटने की संभावना तथा बारिश और तूफान जैसी परिस्थितियों में प्रदर्शन के आधार पर परीक्षण किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि परीक्षण के बाद सबसे टिकाऊ कपड़े का चयन किया जाएगा और भविष्य में सभी स्थानों पर तिरंगे के लिए उसी का इस्तेमाल किया जाएगा।
तिरंगे को होने वाले नुकसान संबंधी कई शिकायतें मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी ने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली भर में लगाए गए सभी 500 राष्ट्रीय ध्वजों को हटाने का फैसला किया था।
अधिकारियों के अनुसार, राजधानी में 500 स्थानों पर 115 फुट ऊंचे ध्वज दण्ड स्थापित हैं। इन पर लगाए गए पॉलिएस्टर से निर्मित झंडे अपेक्षाकृत मजबूत होते हैं, लेकिन वे तेज हवाओं का सामना नहीं कर पाते।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ध्वजों को आमतौर पर वर्ष में करीब चार बार बदला जाता है, जिनमें स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे अवसर भी शामिल हैं।
भाषा प्रचेता माधव
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