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कोलकाता, 17 जून (भाषा) कोलकाता पुलिस के समक्ष एक महिला माओवादी ने बुधवार को आत्मसमर्पण कर दिया, जिस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने बताया कि शकुंतला महतो ने यहां लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण किया और अधिकारियों को एक आग्नेयास्त्र तथा 46 कारतूस भी सौंपे।
नंद ने कहा, ‘‘वह भाकपा (माओवादी) की जोनल कमेटी की सदस्य थी और वर्षों तक कई माओवादी गढ़ों में सक्रिय रही। उसका आत्मसमर्पण एक महत्वपूर्ण सफलता है और यह नक्सल आंदोलन के घटते प्रभाव को दर्शाता है।’’
पश्चिम बंगाल में झाड़ग्राम जिले के बेलपहाड़ी की निवासी महतो 2001 में माओवादी संगठन में शामिल हुई थी।
इन वर्षों के दौरान वह झारखंड-ओडिशा सीमा क्षेत्र में सक्रिय रही और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों से जुड़ी रही।
पुलिस ने उसके आत्मसमर्पण को माओवादी विरोधी अभियानों में एक बड़ी सफलता बताया।
आत्मसमर्पण के बाद नंद के बगल में बैठी महतो ने कहा, ‘‘मैंने इस उम्मीद के साथ आत्मसमर्पण किया कि सरकार मुझे आवास और अपने परिवार के साथ रहने का अवसर देगी, जैसा कि वादा किया गया है।”
महतो ने उन माओवादियों से मुख्यधारा में लौटने का आग्रह किया, जो अब भी भूमिगत रूप से सक्रिय हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने संगठन में उन लोगों से कहना चाहूंगी जो अब भी समाज से अलग-थलग हैं कि वे मुख्यधारा में वापस लौट आएं। सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है। हथियार छोड़कर विकास के मार्ग पर चलना सभी के लिए अच्छा होगा।’’
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि महतो कई माओवादी गतिविधियों की साजिश रचने में शामिल थी और लंबे समय से झारखंड तथा पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के प्रमुख चेहरों में से एक मानी जाती रही है।
अधिकारियों ने कहा कि वह बेलपहाड़ी, दलमा, घाटशिला, पारसनाथ, बुंडू-तमाड़ और सारंडा समेत कई माओवादी गढ़ों में सक्रिय रही।
कोलकाता के पुलिस आयुक्त ने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में कई माओवादियों को या तो गिरफ्तार किया गया, या उन्हें मार गिराया गया या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। हम उम्मीद करते हैं कि संगठन के और अधिक सदस्य हिंसा की राह छोड़कर सामान्य जीवन में लौट आएंगे।’’
उन्होंने कहा कि महतो के पुनर्वास और कानूनी औपचारिकताएं सरकार की नीति के अनुसार पूरी की जाएंगी।
भाषा
देवेंद्र नेत्रपाल
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