नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों तथा मंत्रियों को गंभीर अपराधों के मामलों में 30 दिन से अधिक समय तक हिरासत में रहने पर पद से हटाने के प्रावधान वाले संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति को प्रस्तावित कानून के समर्थन में कई सुझाव प्राप्त हुए हैं।
समिति की अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने बुधवार को कहा कि राजनीति के अपराधीकरण को समाप्त करने के उद्देश्य का किसी भी पक्ष ने विरोध नहीं किया है।
इस 30-सदस्यीय समिति ने दिल्ली सचिवालय में हितधारकों के साथ बैठक की। इसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के विधि एवं गृह विभाग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय तथा गैर-सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सारंगी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हितधारकों ने विधेयक का समर्थन किया तथा इस संबंध में कुछ लिखित टिप्पणियां और सुझाव भी सौंपे।
उन्होंने बताया कि समिति अब तक 11 बैठकें कर चुकी है और राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़, तेलंगाना तथा पंजाब सहित नौ राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर चुकी है।
भाजपा सांसद ने दावा किया कि तेलंगाना और पंजाब जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों ने भी कुछ संशोधनों का सुझाव देने के साथ प्रस्तावित कानून की मूल भावना का समर्थन किया है।
सारंगी का कहना था कि प्रस्तावित कानूनों का उद्देश्य राजनीति के अपराधीकरण को समाप्त करना, जेल से सरकार चलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना तथा सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही को मजबूत करना है।
संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 तथा इससे संबंधित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 पिछले साल 20 अगस्त को लोकसभा में पेश किए गए थे। फिर इसे संयुक्त समिति के विचार के लिए भेजा गया।
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