नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी।
मंत्रालय ने कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि पिछले वित्त वर्ष के 1.54 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन के मुकाबले 15.6 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। उसने कहा कि इसके अलावा, वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में इसमें 110 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जब रक्षा उत्पादन का आंकड़ा 84,643 करोड़ रुपये था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत के रक्षा उत्पादन में यह ‘‘उल्लेखनीय वृद्धि’’ रक्षा उत्पादन विभाग और अन्य हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा, ‘‘यह वृद्धि देश के विस्तार ले रहे रक्षा औद्योगिक आधार का एक स्पष्ट संकेतक है।’’
रक्षा मंत्री सिंह ने कहा, ‘‘निरंतर नीतिगत समर्थन, कई नयी पहलों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और बढ़ती निर्यात क्षमताओं के साथ, रक्षा उत्पादन क्षेत्र आने वाले वर्षों में और अधिक गति पकड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।’’
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रक्षा उत्पादन में हुई वृद्धि ‘‘उल्लेखनीय’’ है और वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 84,643 करोड़ रुपये था, जिसके मुकाबले इसमें 110 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मंत्रालय ने कहा कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2013-14 के 43,746 करोड़ रुपये से लगभग चार गुना बढ़कर इस स्तर पर पहुंचा है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का कुल उत्पादन में लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा रहा, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान 24 प्रतिशत रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 22 प्रतिशत से अधिक है।’’
इसने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2025-26 में निजी क्षेत्र का हिस्सा लगभग 42,000 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है जो रक्षा ‘परिवेशी तंत्र’ में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।’’
मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन में हुई वृद्धि ने वित्त वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड रक्षा निर्यात को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों को मिल रही निरंतर गति को दर्शाती है।’’
भाषा खारी अमित
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