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'हिरासत में यातना' के दौरान मारे गए दलित युवक का तमिलनाडु में अंतिम संस्कार

मदुरै, 17 जून (भाषा) तमिलनाडु में मार्च में पुलिस हिरासत में कथित तौर पर ‘‘प्रताड़ित किए जाने के कारण’’ मारे गए 26 वर्षीय दलित युवक का बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच यहां एक विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया।

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ द्वारा सख्त निर्देश दिए जाने पर, मौत के 101 दिन बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया।

इससे पहले, परिवार के सदस्यों ने हिरासत में कथित तौर पर ‘‘हत्या’’ में शामिल सभी पुलिस कर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए शव को लेने से इनकार कर दिया था।

शिवगंगा जिले के मनामदुरै के रहने वाले आकाश को स्थानीय पुलिस ने मारपीट के एक मामले में छह मार्च को गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने दावा किया था कि भागने के प्रयास के दौरान उसके पैर की हड्डी टूट गई थी लेकिन आकाश ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने कथित तौर पर बयान दर्ज कराया था कि पुलिसकर्मियों ने उसे बेरहमी से पीटा और उसका पैर तोड़ दिया।

मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में आठ मार्च को उसकी मौत हो गई और बाद में पोस्टमार्टम में उसके शरीर पर लगभग 28 चोटों का पता चला। इसके बाद व्यापक पैमाने पर आक्रोश फैल गया और परिजनों तथा अनुसूचित जाति कल्याण संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए।

विरोध प्रदर्शन के बाद नौ मार्च को मामले की जांच अपराध शाखा-अपराध अन्वेषण विभाग (सीबी-सीआईडी) को सौंप दी गई और एक निरीक्षक एवं एक उपनिरीक्षक सहित छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।

मद्रास उच्च न्यायालय ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सीबी-सीआईडी ​​को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ हत्या और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का 13 मार्च को निर्देश दिया। सीबी-सीआईडी ​​ने मनामदुरै के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) राजा और कई निरीक्षकों सहित 11 कर्मियों से पूछताछ की है।

पीड़ित के पिता राजेश कन्नन ने 50 लाख रुपये के मुआवजे और घटना से कथित तौर पर जुड़े सभी 16 पुलिस कर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया था और परिवार ने मनामदुरै में पुराने बस अड्डे के पास लगातार धरना दिया था।

उच्च न्यायालय ने सोमवार को आदेश दिया कि यदि परिवार उसी दिन शाम पांच बजे तक शव स्वीकार नहीं करता है, तो स्थानीय प्रशासन सम्मानजनक ढंग से उसका अंतिम संस्कार कराए।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी बुधवार सुबह जब शव को ले जाने के लिए अस्पताल के शवगृह में पहुंचे तो परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे रिश्तेदारों को कुछ समय के लिए हिरासत में लेकर वाहन में बैठाकर रखा और बाद में उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शवदाह गृह ले जाया गया।

भाषा तान्या सिम्मी

सिम्मी