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कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने पार्टी की पंजाब इकाई के नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक की

चंडीगढ़, 16 जून (भाषा) कांग्रेस द्वारा नियुक्त तीन पर्यवेक्षकों ने पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ दिल्ली में अलग-अलग बैठकें कीं। इस बातचीत में राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और उन अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिन्हें चुनावी राज्य में प्रमुखता से उठाये जाने की जरूरत है।

कुछ दिन पहले, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) का पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। उन्हें पंजाब में मौजूदा राजनीतिक हालात का जायजा लेने और पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, क्योंकि अगले साल की शुरुआत में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, तीनों पर्यवेक्षकों ने मंगलवार को कांग्रेस की पंजाब इकाई के नेताओं के साथ बैठक करने की अपनी तीन दिन की कवायद शुरू की।

पहले दिन, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं -- जिनमें (पंजाब में) विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य विजय इंदर सिंगला शामिल हैं -- ने तीनों पर्यवेक्षकों से मुलाकात की।

इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल और प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रमुख शमशेर सिंह डुल्लो भी उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने पार्टी के तीनों नेताओं से मुलाकात की।

दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए रंधावा ने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार जैसे अन्य मुद्दों के अलावा, पंजाब में इस समय ‘गैंगस्टरिज्म’ सबसे बड़ा मुद्दा है।

गुरदासपुर के सांसद ने कहा कि राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

भट्टल ने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के पार्टी नेताओं से मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर राय ली गई।

प्रदेश इकाई में कथित गुटबाजी के बारे में पूछे जाने पर, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई अंदरूनी कलह नहीं है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों में किन अहम मुद्दों को उठाया जाएगा, इस पर भी चर्चा हुई। पार्टी नेताओं ने बिगड़ती कानून-व्यवस्था, मादक पदार्थ से जुड़ी समस्या, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों पर जोर दिया।

तीन दिन चलने वाली इस कवायद के दौरान, तीनों पर्यवेक्षक -- पार्टी के विधायकों, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और जिला इकाई के अध्यक्षों से भी मुलाकात करेंगे।

भाषा सुभाष प्रशांत

प्रशांत