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ब्रिटेन ने रूस के गुप्त बेड़े के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए

(अदिति खन्ना)

लंदन, 16 जून (भाषा) ब्रिटेन ने मंगलवार को रूस के तेल टैंकर के गुप्त बेड़े के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की।

ब्रिटेन की यह घोषणा एक भारतीय कैप्टन पर पश्चिमी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन का आरोप लगने के एक दिन बाद आई है।

अजय पंत (38) को राष्ट्रीय अपराध एजेंसी (एनसीए) ने ब्रिटिश सशस्त्र बलों के साथ मिलकर चलाए गए एक संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार किया। यह अभियान इंग्लिश चैनल में रूस के गुप्त बेड़े के एक तेल टैंकर को रोकने के लिए किया गया था।

ब्रिटेन की स्थानीय मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पंत को मंगलवार को शुरुआती सुनवाई के लिए बॉर्नमाउथ पुलिस थाना से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए साउथेम्प्टन मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। इस दौरान उन्होंने अपना नाम की पुष्टि की और बताया कि वह भारत के निवासी हैं।

जिला न्यायाधीश डेविड रॉबिन्सन ने मामले को सुनवाई की तैयारी के लिए बॉर्नमाउथ शाही अदालत भेज दिया है और तब तक पंत को हिरासत में रखने का आदेश दिया।

उन पर ‘‘रूस प्रतिबंध-2019 के नियम 46जेड9बी का उल्लंघन करने और जून 2026 के दौरान रूस से किसी तीसरे देश को जहाज के जरिए सीधे या परोक्ष रूप से प्रतिबंधित तेल/तेल उत्पाद की आपूर्ति करने का आरोप लगाया गया है।

मुख्य शाही अभियोजक जोआन जैकीमेक ने कहा, “राष्ट्रीय अपराध एजेंसी की जांच और पिछले सप्ताहांत इंग्लिश चैनल से गुजर रहे गुप्त बेड़े के तेल टैंकर ‘एमवी स्मर्टोस’ को जब्त किए जाने के बाद, शाही अभियोजन सेवा ने रूस पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए अजय पंत पर मुकदमा चलाने का फैसला किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लोक अभियोजकों ने यह साबित किया है कि मामले को अदालत में ले जाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाना जनहित में है। हमने राष्ट्रीय अपराध एजेंसी के साथ मिलकर काम किया, क्योंकि वे अपनी जांच कर रहे हैं।’’

माना जा रहा है कि लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने राजनयिक पहुंच की मांग की है और ब्रिटेन की ओर से जवाब का इंतज़ार कर रहा है।

जानकारी के मुताबिक डॉरसेट के तट पर खड़े जहाज़ पर मौजूद चालक दल (जिसमें 24 भारतीय और जॉर्जियाई नागरिक शामिल हैं) की कुशलता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया जारी है।

इस बीच, ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि नए प्रतिबंधों से रूस के ‘‘जर्जर और पुराने गुप्त बेड़’ पर और सख्ती की जाएगी। इसके तहत, पिछले महीने लागू की गई नई और ज्यादा मज़बूत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 20 से अधिक तेल टैंकर को निशाना बनाया जाएगा।

इसमें कहा गया है कि इस कदम से उन लोगों पर भी शिकंजा कसेगा जिन पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ‘‘गैर-कानूनी तेल व्यापार’’ में मदद करने का संदेह है। साथ ही, जहाज़ों का बीमा करने वाली कंपनियों और जहाजरानी से जुड़ी अन्य सेवाओं पर भी और प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने एक बयान में कहा, ‘‘ये प्रतिबंध उन जहाजों, पैसों और उन लोगों को निशाना बनाने के लिए हैं जो रूस की युद्ध-अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं और बदले में यूरोप की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अपने जी7 सहयोगियों के साथ मिलकर, हम पुतिन और उनके सहयोगियों पर तब तक दबाव बढ़ाते रहेंगे जब तक कि रूस की युद्ध मशीन रुक न जाए और हमारे महाद्वीप में शांति वापस न आ जाए।’’

ब्रिटेन ने का दावा है कि वह जी7 समूह का पहला देश है जिसने रूस के उन कई तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर पर प्रतिबंध लगाया है, जिन्हें रूस ने भारी कीमत पर खरीदा था। इन टैंकर का इस्तेमाल रूस के प्रतिबंधित ‘आर्कटिक एलएनजी-2’ परियोजना के लिए किया जाना था, जो ‘‘क्रेमलिन के लिए गलत तरीके से कमाई करने की कोशिश में’ लाखों टन एलएनजी निर्यात करने के लिए जिम्मेदार है।

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा, ‘‘ क्रेमलिन अपनी जंग जारी रखने के लिए पुराने हो रहे ‘गुप्त जहाज बेड़ो’ से लेकर गुप्त वित्त नेटवर्क तक के लिए लगातार और संदिग्ध हथकंडे अपना रहा है, लेकिन ब्रिटेन उसे रोकने में एक कदम आगे है।’’

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश