नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) दिल्ली पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय पाकिस्तान-समर्थित कथित आतंकी-अपराधी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर सात लोगों को गिरफ़्तार किया है, जिन पर पाकिस्तान से हथियार और नशीले पदार्थ तस्करी करने और संभावित ठिकानों की टोह लेने का आरोप है। इन ठिकानों की तस्वीरें कथित तौर पर सीमा पार बैठे आकाओं के साथ साझा की गई थीं। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपी कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर और आतंकवादी शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अजमल गुज्जर के लिए काम कर रहे थे। उनके बारे में जांचकर्ताओं का मानना है कि वे पाकिस्तान की ‘इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस’ (आईएसआई) के संरक्षण में सक्रिय हैं।
उन्होंने कहा कि गिरोह क्षेत्र में अवैध हथियार, कारतूस और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल था।
उन्होंने कहा कि आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले मोहित उर्फ योगी (26), अनस उर्फ अनस त्यागी (26), दीपक अगरोला (38), आरिफ (30), जतन (29), साबिर (30) और पंजाब में फतेहगढ़ निवासी करनवीर सिंह (26) के तौर पर हुई है।
अभियान के दौरान पांच अत्याधुनिक अर्ध-स्वचालित पिस्तौल, 41 कारतूस, सात मोबाइल फोन और एक एसयूवी कार जब्त की गई। फोन में भट्टी और गुज्जर से जुड़ी कथित तौर पर आपत्तिजनक बातचीत और ‘वॉयस नोट्स’ मिले हैं।
पुलिस ने नशीले पदार्थों और अवैध हथियारों की कथित बिक्री से हासिल पैसे को स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले कई बैंक खातों का विवरण भी बरामद किया।
पुलिस के मुताबिक, मई में मिली खुफिया जानकारी से संकेत मिला कि भट्टी और गुज्जर स्थानीय गुर्गों के जरिए दिल्ली-एनसीआर में बड़ी आपराधिक और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं।
सूचना पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने जांच शुरू की और जाल बिछाया, जिससे गिरोह के एक प्रमुख सदस्य मोहित उर्फ योगी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में यमुना विहार के पास भागीरथी जल शोधन संयंत्र के निकट से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने कहा कि मोहित के पास से एक अवैध पिस्तौल, चार कारतूस और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया जिसमें गुज्जर के साथ कथित तौर पर बातचीत थी।
पूछताछ और उसके बाद की जांच के दौरान, अधिकारियों ने दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक व्यापक नेटवर्क का खुलासा किया और जांचकर्ताओं को ऐसे लोगों का पता चला, जो हथियारों एवं मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त थे। साथ ही, वे अपने गुर्गों को भर्ती करने एवं संभावित लक्ष्यों की टोह लेने में भी शामिल थी।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान अनस ने बताया कि भट्टी एवं गुज्जर ने अपने गुर्गों को दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों की जानकारी इकट्ठा करने का निर्देश दिया था। इन स्थानों की तस्वीरें एवं वीडियो पाकिस्तान में मौजूद आकाओं को भेजे गए, ताकि आगे की साजिशें रची जा सकें।
जांचकर्ताओं ने कहा कि इस गिरोह ने सोशल मीडिया मंचों एवं एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का उपयोग करके संवेदनशील युवाओं की पहचान की एवं उन्हें अपने गिरोह में शामिल किया और इसके लिए उन्हें जल्दी पैसे कमाने का लालच दिया।
जांच में यह भी पता चला कि यह नेटवर्क पकड़े जाने से बचने के लिए कई गुप्त तरीकों का इस्तेमाल करता था। इनमें एन्क्रिप्टेड ऐप, फर्जी पहचान पर बनाए गए सोशल मीडिया अकाउंट, अस्थायी मोबाइल नंबर, हवाला के जरिए पैसों का लेन-देन समेत अन्य तरीकों का इस्तेमाल करता था।
पुलिस ने आरोप लगाया कि मोहित, आरिफ, अनस और फरार आरोपी हैं और शुरू में अनौपचारिक रूप से पैसे कर्ज के तौर पर देने की गतिविधियों में शामिल थे और पैसे कर्ज लेने वालों को डराने-धमकाने के लिए अवैध हथियार रखते थे। सोशल मीडिया के माध्यम से, वे अत्याधुनिक हथियारों की तलाश में अजमल गुज्जर के संपर्क में आए।
जांचकर्ताओं ने दावा किया कि आरिफ ने एक लाख रुपये में गुर्जर से एक पिस्तौल खरीदी, जिसका भुगतान विदेश में काम करने वाले व्यक्तियों से जुड़े कई खातों के माध्यम से किया गया था।
पुलिस ने खुलासा किया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से कई के आपराधिक रिकॉर्ड हैं और वे हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, शस्त्र अधिनियम और स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम से संबंधित मामलों में शामिल रहे हैं।
पुलिस ने कहा कि मॉड्यूल के अन्य सदस्यों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं, जिनमें फरार गुर्गे, हथियार आपूर्तिकर्ता और इसका वित्तपोषण करने वाले संदिग्ध व्यक्ति शामिल हैं।
मॉड्यूल की पूरी गतिविधियों और पाकिस्तान स्थित आकाओं के साथ इसके संबंधों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।
भाषा नोमान नोमान दिलीप
दिलीप