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त्वचा की कसावट में कमी का स्तर दिल्ली के निवासियों में सबसे अधिक पाया गया: अध्ययन

नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) पूरे देश में त्वचा की कसावट में कमी का स्तर सबसे अधिक दिल्ली के निवासियों में पाया गया है। इसके लिए खारे पानी और पराबैंगनी (यूवी) किरणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने को प्रमुख कारणों के रूप में चिह्नित किया गया है। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आयी है।

निंगेन स्किन साइंसेज द्वारा ऑरिगा रिसर्च के सहयोग से किए गए अध्ययन को भारत के सबसे बड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित त्वचा अध्ययनों में से एक बताया गया है। इसके तहत देश के 725 शहरों के 21,373 वयस्कों का विश्लेषण किया गया।

शोधकर्ताओं ने ‘स्किनसेंसएआई’ मंच के माध्यम से एआई-संचालित चेहरे के स्कैन का उपयोग करते हुए झुर्रियां, काले घेरे, त्वचा की कसावट, लचीलापन, निर्जलीकरण और रंजकता (पिग्मेंटेशन) सहित 12 मानकों का आकलन किया।

अध्ययन के अनुसार, दिल्ली में त्वचा की कसावट में कमी का गंभीरता स्कोर पांच में से 4.11 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे अधिक है। इसकी तुलना में कोलकाता का स्कोर 3.49 और राष्ट्रीय औसत 3.62 रहा।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इसका मतलब है कि दिल्ली के निवासियों में कोलकाता के लोगों की तुलना में त्वचा की कसावट में कमी की गंभीरता लगभग 18 प्रतिशत अधिक पाई गई। उनका मानना है कि राजधानी की पर्यावरणीय परिस्थितियां त्वचा के तेजी से बूढ़ा होने के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।

दिल्ली में त्वचा के लचीलेपन में कमी का स्कोर पांच में से 3.99 और काले घेरों की गंभीरता का स्कोर 3.80 दर्ज किया गया। रिपोर्ट में इसके लिए प्रदूषण, खारा पानी और पराबैंगनी किरणों के संपर्क को जिम्मेदार ठहराया गया है।

अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अक्सर 200 से 400 के बीच रहता है, जबकि कई इलाकों में पानी में कुल घुलित ठोस पदार्थ (टीडीएस) का स्तर 300 से 500 के बीच पाया जाता है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि निष्कर्ष क्षेत्र-विशिष्ट त्वचा देखभाल उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं और दिल्ली के लिए प्रदूषण-रोधी त्वचा देखभाल समाधानों को महत्वपूर्ण बताया है।

वर्ष 2023 से 2025 के बीच किए गए इस अध्ययन के निष्कर्षों को पत्रिका ‘क्यूरियस’ में भी प्रकाशित किया गया है।

भाषा अमित सुरेश

सुरेश