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वैध यूरोप यात्रा का वादा कर हरियाणा के युवक को ‘डंकी रूट’ से यूरोप भेजा, सात माह जेल में रहा

कुरुक्षेत्र, 16 जून (भाषा) हरियाणा के एक युवक को वैध तरीके से यूरोपीय देश मोल्दोवा ले जाने का वादा कर कथित तौर पर खतरनाक ‘डंकी रूट’ से ले जाने और महीनों तक उसका उत्पीड़न करने का मामला सामने आया है।

कुरुक्षेत्र निवासी रोहित नामक युवक को महीनों तक दुर्व्यवहार, जबरन वसूली, कड़ाके की ठंड और कैद का सामना करना पड़ा और आखिरकार करीब आठ महीने बाद वह घर लौट पाया।

जिले के डुंगी गांव निवासी रोहित ने आरोप लगाया है कि ट्रैवल एजेंट ने उन्हें अवैध ‘डंकी रूट’ से ले जाकर उनके साथ धोखाधड़ी की। उन्होंने दावा किया कि परिवार ने वैध यात्रा की व्यवस्था करने के लिए एजेंट को नौ लाख रुपये दिए थे।

‘डंकी रूट’ का अभिप्राय गैर-कानूनी तरीके से दूसरे देशों में जाने के रास्ते से है। इसका इस्तेमाल वे लोग करते हैं जो बिना सही कागज़ात के अमेरिका, कनाडा और यूरोप जैसे देशों में दाखिल होने की कोशिश करते हैं। अक्सर मानव तस्करी करने वाले नेटवर्क इसमें मदद करते हैं।

रोहित ने सोमवार को पेहोवा में संवाददाताओं को बताया कि उनकी परेशानी की शुरुआत नौ अक्टूबर, 2025 को दुबई ले जाए जाने के साथ शुरू हुई।

रोहित ने बताया कि दुबई से उन्हें रूस भेजा गया और फिर एक पाकिस्तानी एजेंट उन्हें बेलारूस ले गया, जबकि वादा उन्हें सीधे मोल्दोवा भेजने का किया गया था।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी एजेंट ने उसके पैसे छीन लिए, बार-बार और पैसे की मांग की और उसके तथा एक अन्य युवक के साथ बहुत बुरा बर्ताव किया।

रोहित ने आरोप लगाया कि एजेंट ने उन्हें चाकू दिखाकर धमकाया और परिवारों से और पैसे का इंतजाम करने के लिए दबाव डाला।

रोहित के मुताबिक एक हिंदू होने के नाते उन्होंने सफर के दौरान ब्रेड के साथ परोसे गए कथित ‘बीफ को खाने से इनकार कर दिया और जब उन्हें पता चला कि परोसा जा रहा मांस बीफ है, तो ज़्यादातर समय ब्रेड खाकर ही गुज़ारा करते रहे।

उन्होंने दावा किया कि बेलारूस के जंगलों में फंसे होने के दौरान उन्हें शून्य से चार डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान में भी बिना कंबल के एक तंबू में रखा गया था।

रोहित ने बताया कि बेलारूस में लगभग 10 दिन तक मुश्किल हालात में गुजारने के बाद उन्हें और कई अन्य लोगों को यूरोप में गैर-कानूनी तरीके से दाखिल कराने के लिए लातविया की सीमा पर ले जाया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा पार करने के बाद उन्हें लातवियाई सैनिकों ने हिरासत में ले लिया, उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए, उनके साथ मारपीट की और पूछताछ के दौरान उन्हें बिजली के झटके दिए।

रोहित के मुताबिक, बाद में उन्हें वापस सीमा के उस पार भेज दिया गया और चेतावनी दी गई कि वे दोबारा न लौटें।

उन्होंने बताया कि कई दिनों तक भटकने के बाद वह फिर से पाकिस्तानी एजेंट के चंगुल में फंस गये, जो लगातार पैसे की मांग कर रहा था। आखिरकार, जब उस समूह ने भारत लौटने की इच्छा जताई, तो उन्हें कथित तौर पर बेलारूस में मिन्स्क पुलिस के हवाले कर दिया गया।

रोहित ने बताया कि भारतीय दूतावास से मदद मिलने से पहले उन्होंने लगभग सात महीने जेल में बिताए। आपात पासपोर्ट जारी होने और परिवार द्वारा यात्रा का इंतजाम किए जाने के बाद, वह 13 जून, 2026 को भारत लौट पाए।

रोहित के पिता और पेशे से टैक्सी चालक मनोज कुमार ने बताया कि उन्होंने एजेंट को नौ लाख रुपये देने के लिए अपनी जमीन बेची थी और पैसे उधार लिये थे।

परिवार अब उस भारतीय एजेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस से संपर्क करने की योजना बना रहा है। परिवार ने एजेंट पर धोखाधड़ी और मानव तस्करी का आरोप लगाया है।

हाल के वर्षों में हरियाणा और पंजाब के कई युवाओं ने बताया है कि वे गैर-कानूनी रास्तों से विदेश भेजने का वादा करने वाले धोखेबाज ट्रैवल एजेंटों के झांसे में आ गए और उन्हें भी इसी तरह के अनुभवों का सामना करना पड़ा।

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश