नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए सांसदों के समूह को मान्यता देने के मुद्दे पर फैसला करने से पहले उसका और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, दोनों का पक्ष सुनेंगे।
टीमएसी के 20 बागी लोकसभा सदस्यों ने ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय की घोषणा की है। इस दल ने ज्योतिप्रकाश चटर्जी को अपना अध्यक्ष घोषित किया है।
इस बीच, टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि एनसीपीआई, तृणमूल के सभी असंतुष्ट लोकसभा सदस्यों को अपने साथ शामिल करने पर सहमत हो गई है और इन सांसदों की संख्या मौजूदा 20 से बढ़कर 22 तक पहुंच सकती है।
दस्तीदार ने यह भी स्पष्ट किया कि बागी सांसदों का पश्चिम बंगाल विधानसभा में अलग समूह बनाने वाले टीएमसी के असंतुष्ट विधायकों से कोई संबंध नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने उस समूह को मान्यता दे दी है।
सूत्रों का कहना है कि बिरला टीएमसी के मामले में कोई भी फैसला करने से पहले दोनों पक्षों को सुनेंगे।
यदि वह बागी सांसदों के समूह को एनसीपीआई के सदस्य के रूप में मान्यता दे देते हैं तो फिर यह पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में लोकसभा सदस्यों की संख्या के लिहाज से भाजपा के बाद दूसरा सबसे बड़ा घटक हो जाएगी। इस गठबंधन के तीन प्रमुख घटकों- भाजपा के 240, तेलुगुदेशम पार्टी के 16 और जनता दल (यूनाइटे) के 12 लोकसभा सदस्य हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी से जुड़े सूत्रों ने सोमवार को कहा कि अभिषेक बनर्जी को बिरला के साथ मुलाकात के लिए सिर्फ दो घंटे पहले सूचित किया गया और यह संदेश भी उस वक्त भेजा गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनसे पूछताछ कर रहा था।
टीएमसी सूत्रों का यह भी कहना है कि अभिषेक बनर्जी को बीते सोमवार को दिन में करीब दो बजे लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय से एक ईमेल आया, जिसमें कहा गया था कि वह दो घंटे बाद चार बजे बिरला से मुलाकात करें। इसके तत्काल बाद लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद को फोन किया और इस ईमेल के बारे में बताया।
सूत्रों के मुताबिक, इसके जवाब में आज़ाद ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय को बताया कि बनर्जी ‘‘सभी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध' हैं और वह कोलकाता के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी कार्यालय में जांच में सहयोग कर रहे हैं।
बाद में आज़ाद ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर उन्हें इस ईमेल के बारे में जानकारी दी।
सूत्रों ने यह भी बताया कि बनर्जी पूछताछ के बाद आधी रात के आसपास लौटे।
सूत्रों ने कहा कि टीएमसी के मामले में लोकसभा अध्यक्ष का कोई भी निर्णय संसद के मानसून सत्र से पहले लिया जाएगा, जो आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है।
उन्होंने बताया कि अलग हुए गुट को मान्यता दी जाए या नहीं, इस पर निर्णय केंद्रीय विधि मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर लिया जाएगा। मंत्रालय किसी वरिष्ठ विधि अधिकारी से परामर्श के बाद अपनी राय देगा।
सूत्रों के अनुसार, कानूनी राय इसलिए ली जाएगी, ताकि लोकसभा अध्यक्ष का फैसला, यदि अदालत में चुनौती दी जाती है, तो न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरा उतर सके।
तेज़ी से बदलते घटनाक्रम में दस्तीदार ने बताया कि एनसीपीआई ने चटर्जी को अपना नया अध्यक्ष बनाया है। टीएमसी के बागी लोकसभा गुट के एनसीपीआई में विलय की घोषणा के बाद यह पार्टी चर्चा में आ गई है।
दस्तीदार का यह बयान एनसीपीआई संस्थापक शेवली कुंडू के अध्यक्ष पद से हटने की घोषणा के एक दिन बाद आया है। कुंडू के इस्तीफे के बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि दस्तीदार ने खुद पार्टी की कमान संभाल ली है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि चटर्जी एनसीपीआई के नए अध्यक्ष हैं।
हालांकि, चटर्जी के बारे में बहुत जानकारी सामने नहीं आई है।
खुद को एनसीपीआई का राष्ट्रीय संगठन महासचिव बताने वाले शांतनु डे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्हें नए अध्यक्ष के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
डे ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी कौन हैं। मुझे कोई अंदाज़ा नहीं है कि एनसीपीआई के साथ क्या हो रहा है। यह वह पार्टी है जिसके लिए मैंने इतनी मेहनत की। मुझे खुशी है कि बड़े नेता हमारे साथ जुड़ रहे हैं, लेकिन अब तक उन्होंने हमसे संपर्क नहीं किया है। मुझे इस बात से निराशा है कि हमें अंधेरे में रखा जा रहा है।’’
एनसीपीआई ने जनवरी 2023 में खुद को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराया था। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, इसके पते में पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराइल स्थित एक भवन का जिक्र है और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी मौजूदगी सीमित रही है।
भाषा हक
हक सुरेश
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