नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) भारत और जापान ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और सतत विकास कार्यक्रमों पर सहयोग बढ़ाने के लिए 2015 के पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत एक संयुक्त क्रेडिटिंग व्यवस्था को लागू करने के नियम अपनाए हैं। पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
दोनों देशों ने 2025 में संयुक्त क्रेडिटिंग व्यवस्था के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इस व्यवस्था में ऐसे सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार किया गया जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी या उसे हटाने वाली गतिविधियों पर केंद्रित है। साथ ही, यह भारत में सतत विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करता है और दोनों देशों द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्त की गई प्रतिबद्धताओं को अमली जामा पहनाने में मदद करता है।
एक अधिकारी ने बताया, ‘‘लागू करने के नियम में मजबूत शासी व्यवस्था तय की गई है। इसमें दोनों सरकारों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त समिति, परियोजना को मंजूरी देने की पारदर्शी प्रक्रिया, तीसरे पक्ष से प्रमाणन और सत्यापन, सतत विकास के लिए सुरक्षा उपाय और क्रेडिट जारी करने व स्थानांतरण पर नजर रखने के लिए नेशनल रजिस्ट्री शामिल हैं।’’
संयुक्त क्रेडिटिंग व्यवस्था का उद्देश्य भारत में कम-कार्बन उत्सर्जन करने वाली प्रौद्योगिकी वाली परियोजनाओं के लिए निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता-निर्माण को बढ़ावा देना है, ताकि जलवायु परिवर्तन को कम करने और सतत विकास में मदद मिल सके।
भाषा धीरज शफीक
शफीक