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‘इंडिया’ गठबंधन को लेकर कांग्रेस और संवेदनशील बने, वाम दल भी सक्रिय भूमिका निभाएं: दीपांकर

(अंजलि ओझा)

नयी दिल्ली, 14 जून (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस को विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के भीतर अधिक जिम्मेदार, संवेदनशील और सबको साथ लेकर चलने वाली भूमिका निभानी होगी, जबकि वाम दलों को वैचारिक स्तर पर सक्रिय पहल करते हुए जन आंदोलनों को मजबूत करना चाहिए।

भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में यह भी कहा कि हाल के चुनावी झटकों के बाद 'इंडिया' गठबंधन को खुद को फिर से संगठित कर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना होगा।

उनका कहना था, ‘‘गठबंधन बैठक में एक तरह की तात्कालिकता का एहसास था। सभी का मानना था कि अब समय आ गया है कि हम इस प्रक्रिया को फिर शुरू करें और कुछ ठोस करें।'

भट्टाचार्य ने कहा कि यह बैठक ऐसे समय हुई, जब विपक्षी दलों को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बड़े राजनीतिक झटके लगे हैं। ऐसे में गठबंधन को अधिक सक्रिय और उद्देश्यपूर्ण ढंग से काम करना होगा।

उनके मुताबिक, विपक्षी दल इस बात से भी अवगत हैं कि परिसीमन का मुद्दा फिर से राजनीतिक एजेंडे में शामिल हो सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अप्रैल में परिसीमन के मुद्दे को फिलहाल टालने में सफल रहे थे, लेकिन मई के इस जनादेश के बाद भाजपा निश्चित रूप से पूरे परिसीमन एजेंडे के साथ फिर आएगी और वह महिला आरक्षण को भी इससे जोड़ने की कोशिश करेगी। इसलिए हमें यह लड़ाई फिर लड़नी होगी।'

भट्टाचार्य ने कहा कि बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में विपक्ष के लिए ऐसी लड़ाइयां पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकती हैं।

उनके मुताबिक, ऐसे समय में गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को इसे मजबूत बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस खुद को मजबूत करने की कोशिश में लगी है। इसलिए उसके लिए संगठन को फिर से खड़ा करना प्राथमिकता है।'

उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी एकजुटता का सबसे अधिक लाभ भी कांग्रेस को ही मिला।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘कांग्रेस को भी यह फैसला करना होगा कि इस गठबंधन को मजबूत करने जरूरत है। देशव्यापी उपस्थिति वाली सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण उसे गठबंधन के प्रति अधिक जिम्मेदार, अधिक संवेदनशील और अधिक समायोजनकारी होना होगा।'

भट्टाचार्य ने कहा कि वाम दलों को भी विपक्षी गठबंधन में अधिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

उन्होंने कहा, 'यह गठबंधन कोई कांग्रेस का प्रोजेक्ट नहीं है। देश को इसकी जरूरत है। इसलिए इसमें शामिल सभी दलों की हिस्सेदारी हो।'

उन्होंने कहा, ‘‘वाम दलों का काम केवल इस या उस पार्टी की शिकायत करना नहीं है। उन्हें पूरे 'इंडिया' गठबंधन को अपना मानते हुए विशेष रूप से वैचारिक मोर्चे और आंदोलन के स्तर पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।’’

भाषा हक हक सुरेश

सुरेश