इंदौर (मध्यप्रदेश), 16 जून (भाषा) देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के महावीर नगर में मंगलवार को कई लोगों ने सरकारी नलकूप में कथित तौर पर सीवेज के पानी के रिसाव के कारण उल्टी-दस्त और अन्य समस्याओं की शिकायत की जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने इस जलस्त्रोत के उपयोग पर रोक लगाते हुए स्वास्थ्य सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब शहर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के दौरान दूषित पेयजल की आपूर्ति से जुड़ी मौतों के मामले की न्यायिक जांच जारी है।
इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के क्षेत्रीय अधिकारी विनोद अग्रवाल ने बताया कि वॉर्ड 16 के महावीर नगर से एक सरकारी नलकूप में कथित तौर पर सीवेज के पानी के रिसाव से पेयजल दूषित होने की शिकायत मिली थी।
उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर आला अफसरों ने मौके का निरीक्षण किया। क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक एहतियात के तौर पर नलकूप बंद करा दिया गया है और सीवेज लाइन की सफाई करा दी गई है।
अग्रवाल के अनुसार बरसों पुराना यह नलकूप उस दौर का है, जब महावीर नगर ग्राम पंचायत के तहत आता था।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में नलकूप से जलापूर्ति रुकवाकर टैंकर के जरिये घर-घर पानी पहुंचाया जा रहा है।
आईएमसी के आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि महावीर नगर में दूषित पेयजल से लोगों के बीमार होने की शिकायत पर निगम का दल क्षेत्र में सर्वेक्षण कर रहा है और इसकी रिपोर्ट के आधार पर उचित कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि पिछले कई दिन से महावीर नगर में गंदे और बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही थी। उनका कहना है कि दूषित पानी पीने से कई परिवारों में उल्टी, दस्त और पेट संबंधी समस्याओं की शिकायत सामने आई है।
स्थानीय निवासी रानी मालवीय ने कहा, 'मेरे बच्चे, पति और घर के अन्य लोगों को पिछले आठ दिन से उल्टी-दस्त और घबराहट की शिकायत है। पूरी गली के लोग इस तरह की परेशानियों से जूझ रहे हैं।'
मालवीय ने दावा किया कि सीवेज का पानी सरकारी नलकूप में मिलने से पेयजल दूषित हुआ। उन्होंने कहा कि उनके मोहल्ले के कई बच्चों की भी तबीयत खराब हुई है।
इससे पहले, शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 के दौरान दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप में कई लोगों की मौत हो गई थी।
स्थानीय लोगों और कांग्रेस का दावा है कि दूषित पेयजल के कारण इस इलाके में 36 लोगों की मौत हुई।
हालांकि, इस मामले पर विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को चर्चा के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई।
भागीरथपुरा की पेयजल त्रासदी की न्यायिक जांच मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग कर रहा है। भाषा हर्ष जोहेब
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