त्रिशूर, 16 जून (भाषा) केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की साधारण बसों में महिलाओं के लिए शुरू की गई मुफ्त यात्रा योजना को लेकर राज्य के निजी बस संचालकों ने मंगलवार को गहरी चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने उनसे कोई परामर्श किए बिना यह योजना लागू कर दी और यह उनके अस्तित्व को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
निजी बस संचालकों के संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी दैनिक सवारियों में महिलाओं की संख्या काफी अधिक होती है और सोमवार को ‘प्रियदर्शिनी’ योजना शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में महिला यात्री सरकारी बसों की ओर रुख कर रही हैं।
‘निजी बस संचालक महासंघ’ के महासचिव हम्सा ने दावा किया कि योजना लागू होने के बाद से निजी बसों में महिला यात्रियों की संख्या में तेज गिरावट आई है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सरकार ने पहले हमें आश्वासन दिया था कि इस योजना को ऐसे तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे निजी बस उद्योग के हित भी सुरक्षित रहें, लेकिन यह खेदजनक है कि अब यह फैसला हमसे किसी प्रकार की चर्चा किए बिना एकतरफा ढंग से ले लिया गया।”
महासचिव ने कहा कि योजना के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन द्वारा दिया गया यह आश्वासन कि निजी बस क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे, कुछ उम्मीद जरूर जगाता है।
हम्सा ने हालांकि चेतावनी दी कि अगर वर्तमान स्थिति बनी रही तो महीने के अंत तक बड़ी संख्या में निजी बसों का परिचालन बंद करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि संचालक पहले से ही ईंधन का खर्च और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
संगठन के महासचिव ने दावा किया कि राजस्व में आई भारी गिरावट के कारण राज्य की लगभग 75 प्रतिशत निजी बसें 30 जून के बाद सड़कों पर उतरने की स्थिति में नहीं होंगी।
उन्होंने कहा कि पथकर में रियायत या ईंधन पर मामूली सब्सिडी जैसे उपाय इस “संकट” से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे।
भाषा जितेंद्र सुरेश
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