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एनसपीआई ने ज्योति प्रकाश चटर्जी को नया अध्यक्ष नियुक्त किया : काकोली

नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को आश्रय देकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) ने ज्योतिप्रकाश चटर्जी को अपना नया अध्यक्ष नामित किया है। तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के धड़े का नेतृत्व कर रही काकोली घोष दस्तीदार ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

काकोली का यह बयान एनसीपीआई की संस्थापक शेवली कुंडू के संवाददाताओं को यह बताने के एक दिन बाद आया कि उन्होंने पार्टी प्रमुख का पद छोड़ दिया है। इससे यह अटकलें शुरू हो गईं कि काकोली ने स्वयं एनसीपीआई की कमान संभाल ली है।

काकोली ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि चटर्जी एनसीपीआई के नए अध्यक्ष हैं। हालांकि, पार्टी की तरह चटर्जी के बारे में भी सार्वजनिक मंच पर बहुत अधिक जानकारी नहीं है।

स्वयं को एनसीपीआई का राष्ट्रीय संगठन महासचिव होने का दावा करने वाले शांतनु डे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्हें नए अध्यक्ष के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी कौन हैं। मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि एनसीपीआई के साथ क्या हो रहा है, जिसके लिए मैंने इतनी मेहनत की थी। मुझे खुशी है कि बड़े नेता हमारे साथ जुड़ रहे हैं, लेकिन अब तक उन्होंने हमसे संपर्क नहीं किया है। मुझे इस बात से निराशा है कि हमें अंधेरे में रखा जा रहा है।’’

शांतनु डे का नाम पार्टी के पुराने प्रचार पोस्टर में एनसीपीआई के महासचिव के तौर पर अंकित था।

एनसीपीआई ने जनवरी 2023 में एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर अपना पंजीकरण कराया था। निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों के मुताबिक पार्टी ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराइल स्थित एक इमारत को पते के तौर पर दर्ज कराया है।

पार्टी ने त्रिपुरा-2023 विधानसभा चुनावों में चार उम्मीदवार मैदान में उतारे और अपने चुनावी नारे ‘‘राजनीतिक दल-बदलुओं को नकारें’’ के जरिये मतदाताओं से अपील की। ​​इन चार में से दो उम्मीदवारों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर किस्मत आजमाई और तीसरे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, जबकि चौथे उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया गया।

पार्टी के एक उम्मीदवार, बरजेडा त्रिपुरा को 536 वोट मिले, जो नोटा (उपलब्ध उम्मीदवारों में से कोई नहीं) से 36 ज़्यादा थे, जबकि दूसरे उम्मीदवार को 286 वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले को 376 वोट मिले।

एनसीपीआई ने निर्वाचन आयोग को दी लेखापरीक्षण रिपोर्ट में बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान उसे ‘‘समर्थकों से चंदे’’ के तौर पर 1,13,075 रुपये मिले। उसका खर्च भी लगभग इतना ही, यानी 1.13 लाख रुपये था जिसके बाद उसके पास मात्र 75 रुपये बचे थे।

भाषा धीरज मनीषा

मनीषा