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उप्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष बड़ी चुनौती, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के प्रयास जरूरी: वन राज्य मंत्री

लखीमपुर खीरी, 15 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना ने सोमवार को कहा कि वन विभाग के लिए मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, और ऐसे प्रयास किए जाने चाहिए जिससे दोनों शांतिपूर्ण ढंग से सह-अस्तित्व में रह सकें।

दुधवा परिसर में आयोजित ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष: चुनौतियां और भविष्य की रणनीति’ विषयक कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि इस तरह के संघर्ष में होने वाली प्रत्येक मानव मृत्यु अत्यंत दुखद और गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा, “जब भी मुझे यह सूचना मिलती है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में किसी महिला की मृत्यु हुई है, तो ऐसा लगता है जैसे मैंने अपने परिवार के किसी सदस्य को खो दिया हो। इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।”

मंत्री ने विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप तैयार करें, जिससे मानव और वन्यजीव बिना टकराव के साथ रह सकें।

उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि के कारण जंगलों का क्षेत्रफल घटा है और वन सीमाओं के पास कृषि, विशेषकर गन्ने की खेती बढ़ने से वन्यजीवों के लिए आश्रय स्थल बने हैं, जिससे संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अवैध वनों की कटाई पर प्रभावी नियंत्रण किया गया है, जिससे वन क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिली है।

मंत्री ने बताया कि हाल के समय में तेंदुए आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं और यह एक गंभीर समस्या बनकर उभरे हैं। उन्होंने गाजियाबाद न्यायालय परिसर के पास तेंदुए की मौजूदगी जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया।

अधिकारियों के अनुसार, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कई अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपाय किए जा रहे हैं, जिनमें सोलर फेंसिंग का विस्तार, गर्मियों में जंगलों में जल स्रोतों का रखरखाव तथा ‘बाघमित्र’ और ‘गजमित्र’ जैसी सामुदायिक पहल शामिल हैं।

मंत्री ने वन्यजीवों के प्रति भारत की सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वन्यजीव प्रकृति और पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।

कार्यशाला में उत्तर प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने बताया कि राज्य सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए पीलीभीत, मेरठ, रानीपुर और सोहागीबरवा में चार वन्यजीव बचाव केंद्र स्थापित किए हैं।

उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक उपायों वाली त्रिस्तरीय रणनीति लागू की जाएगी।

इस कार्यशाला में कई जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भी मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

भाषा

सं, आनन्‍द रवि कांत