Breaking News

‘PM मोदी से हमारे रिश्ते अच्छे’, फ्रांस में द्विपक्षीय बैठक में बोले डोनाल्ड ट्रंप     |   'पीएम मोदी के साथ कई मुद्दों पर हुई बात', मीटिंग के बाद बोले डोनाल्ड ट्रंप     |   'मोदी शांत, संयमित और जबरदस्त...मैं उनके जैसा नहीं', पीएम की तारीफ में बोले डोनाल्ड ट्रंप     |   कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे पर PM मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का आरोप, विशेषाधिकार समिति को सौंपी गई शिकायत     |   समाजवादी पार्टी के 25-26 सांसद टूटने को तैयार: केशव प्रसाद मौर्य     |  

पंजाब : अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया

चंडीगढ़, 15 जून (भाषा) सिखों की शीर्ष धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने एक कथित आपत्तिजनक वीडियो में झूठ बोलने के मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को सोमवार को ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया और सिख समुदाय को निर्देश दिया कि वह मान से ‘अपना संबंध तोड़ दे’।

अकाल तख्त ने धार्मिक बेअदबी रोधी कानून के सिलसिले में 29 जून को राज्य के सभी सिख विधायकों (चाहे वे किसी भी पार्टी के हों) और पंजाब मंत्रिमंडल को तलब किया है।

अमृतसर में ‘पांच सिंह साहिबान’ (सिख धर्मगुरुओं) की बैठक के बाद, अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने अकाल तख्त की ‘फसील’ (मंच) से यह आदेश सुनाया।

यह आदेश कई सिख संगठनों के साथ हुई एक बैठक के बाद जारी किया गया।

इस बैठक में धार्मिक बेअदबी खिलाफ कानून ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

बैठक के दौरान, चार जनवरी को मान के खिलाफ शिकायत के हिस्से के तौर पर जमा किए गए एक ‘‘आपत्तिजनक वीडियो’’ पर गंभीरता से चर्चा की गई।

यह मामला इस साल जनवरी में अकाल तख्त द्वारा मान को समन किये जाने से जुड़ा है। उन पर ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारे का दान-पात्र) के बारे में कथित तौर पर टिप्पणी करने और एक वीडियो क्लिप में ‘सिख गुरुओं’ व मारे गए चरमपंथी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ ‘‘आपत्तिजनक गतिविधियों’’ में शामिल होने का आरोप था।

वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कथित तौर पर मान जैसा दिख रहा है।

गड़गज ने बताया कि जब 15 जनवरी को मान को अकाल तख्त के सचिवालय में बुलाया गया, तो ‘सिंह साहिब’ ने उनसे उस वीडियो के बारे में सवाल किए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वीडियो फर्जी है और इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके बनाया गया था।

उन्होंने कहा कि इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने दो प्रयोगशालाओं से वीडियो की जांच करवाई।

अकाल तख्त साहिब के सचिवालय से 27 जनवरी को मुख्यमंत्री को इस संबंध में एक औपचारिक पत्र भी भेजा गया था। गड़गज ने बताया कि हालांकि, मुख्यमंत्री या उनके कार्यालय से कोई जवाब नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त दो प्रयोगशालाओं से उस वीडियो की जांच करवाई।

गड़गज ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं ने ‘असली’ पाया है।

गड़गज ने कहा कि वीडियो से न तो छेड़छाड़ की गई थी और न ही एआई से बनाया गया था।

उन्होंने कथित आपत्तिजनक हरकत का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘गुरु खालसा पंथ किसी भी हालत में ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं कर सकता।’’

गड़गज ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री का पद सम्मानजनक होता है। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह (मान) ने अकाल तख्त के सामने (वीडियो के बारे में) झूठ बोला।’’

उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर गुरु और सिख समुदाय के हित में फैसले लेने की उनकी क्षमता पर भी सवाल उठाए।

गड़गज ने कहा, ‘‘सिख संगत की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, आज पांच सिंह साहिबों की सभा ने मान को ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया है। गुरु खालसा पंथ को निर्देश दिया जाता है कि वे उनसे कोई संबंध न रखें।’’

अकाल तख्त पर ‘सिंह साहिबान’ के फैसले की घोषणा से कुछ देर पहले, पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) इकाई के मीडिया प्रभारी बलतेज सिंह पन्नू ने कहा कि अकाल तख्त के जत्थेदार के दावों के बावजूद, प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति कौन था।

आप नेता पन्नू ने कहा, ‘‘क्या मुख्यमंत्री मान की लंबाई वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की लंबाई से मेल खाती है? यह कौन सा होटल का कमरा है (जहां वीडियो शूट किया गया था)? रिपोर्ट यह बताने में पूरी तरह नाकाम रही है कि वीडियो में असल में कौन दिख रहा है।’’

पन्नू ने कहा कि गड़गज राजनीतिक हो गए हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अकाल तख्त साहिब पूरे सिख समुदाय का ‘तख्त’ है।

पन्नू ने कहा, ‘‘यह न तो शिअद (शिरोमणि अकाली दल) प्रमुख सुखबीर बादल का है और न ही शिअद का।’’

अकाल तख्त के फैसले के बाद विपक्ष ने मान की आलोचना की और उनके इस्तीफे की मांग की।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘श्री अकाल तख्त साहिब की पवित्रता और सिखों की भावनाओं का सम्मान करते हुए, भगवंत मान को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।’’

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि पंजाब के लोग कुछ गंभीर आरोपों पर आपके (मान) जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं। अकाल तख्त हर सिख के लिए सर्वोच्च लौकिक सत्ता है। इसके फ़ैसले सभी पर बाध्यकारी होते हैं।

शिअद ने ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, ‘‘यह बेहद शर्मनाक है कि राज्य के मुख्यमंत्री हमारे गुरु साहिबानों और शहीदों के प्रति ऐसी दुर्भावनापूर्ण सोच रखते हैं।’’

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई ने कहा कि मान को तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ दे देना चाहिए, क्योंकि श्री अकाल तख्त साहिब के ऐलान के बाद ‘‘गुरु नानक के रास्ते पर चलने वाले कैबिनेट मंत्री और सिख अधिकारी न तो उनके साथ बैठक कर सकते हैं और न ही उनके आदेशों का पालन कर सकते हैं।’’

वडिंग ने कहा, ‘‘चूंकि इसके कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने दो अलग-अलग फोरेंसिक प्रयोगशालाओं से जांच के बाद वीडियो को असली बताया है, इसलिए मान को अकाल तख्त के सम्मान और इस मामले से जुड़ी भावनाओं का ख्याल रखते हुए तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।’’

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा, ‘‘अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और समुदाय के लोग इसके हर आदेश का सम्मान करते हैं और उसे मानते हैं।’’

उन्होंने कहा कि जब अकाल तख्त किसी व्यक्ति को ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित करता है, तो इसके गंभीर सामाजिक और नैतिक परिणाम होते हैं। भाजपा नेता ने कहा कि पंजाब सरकार में काम कर रहे सिख मंत्री और अधिकारी भी असहज स्थिति में पड़ सकते हैं।

धार्मिक बेअदबी कानून ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनयम, 2026’ के बारे में गड़गज ने कहा कि सिख विधायकों को, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, और पंजाब मंत्रिमंडल के सदस्यों को 29 जून को अकाल तख्त के सामने पेश होना चाहिए।

अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी ने पहले बेअदबी-रोधी कानून पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि इसे सिख पंथ से परामर्श किये बिना बनाया गया है।

अकाल तख्त ने इससे पहले राज्य सरकार से कहा था कि वह धार्मिक बेअदबी रोधी कानून से उन प्रावधानों को हटा दे जो ‘‘गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और ‘संगत’ (सिख समुदाय) की भावनाओं के खिलाफ हैं।’’

इस कानून में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने के दोषी को उम्रकैद की सजा सहित कड़े प्रावधान हैं।

भाषा धीरज रंजन

रंजन