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रेसकोर्स इलाके में उन लोगों की झुग्गियों को न तोड़ें जिन्होंने वैकल्पिक आवास नहीं लिए हैं : अदालत

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को निर्देश दिया कि अधिकारी रेस कोर्स इलाके की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले उन लोगों की झुग्गियों को एक जुलाई तक नहीं तोड़ सकते, जिन्होंने वैकल्पिक आवास स्वीकार नहीं किया है और कहीं और रहने नहीं गए हैं।

न्यायमूर्ति तेजस करिया और न्यायाधीश मधु जैन की अवकाश पीठ ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘अगर वे स्वेच्छा नहीं गए हैं, तो आप एक जुलाई तक उन्हें हाथ नहीं लगा सकते।’’

यह टिप्पणी पीठ ने भाई राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप के कुछ निवासियों की अपील पर सुनवाई करते हुए की। इन निवासियों ने एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें उस इलाके से हटाने में दखल देने से इनकार कर दिया गया था। इसी इलाके में प्रधानमंत्री का सरकारी आवास भी है।

अपीलकर्ताओं के वकील ने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि मामला विचाराधीन रहने के बावजूद अधिकारियों ने रविवार को इलाके में तोड़-फोड़ की कार्रवाई की थी, जिसके बाद इस अपील को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया।

अधिवक्ता ने दलील दी कि उच्च न्यायालय और अधिकारियों के बीच इस बात पर ‘सहमति’ थी कि अपील लंबित रहने के दौरान कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, खासकर इसलिए क्योंकि पुनर्वास के मुद्दे पर विचार किया जा रहा था।

केंद्र की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने हालांकि रेखांकित किया कि तोड़-फोड़ की कार्रवाई इस मामले में उच्च न्यायालय के हालिया आदेश के मुताबिक थी और पिछली सुनवाई में अदालत ने सख्त कार्रवाई पर रोक लगाने को लेकर विशेष आदेश देने का अनुरोध ठुकरा दिया था।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वैकल्पिक आवास स्वीकार कर लिया है, वे जेजे क्लस्टर में अपने घरों पर कब्ज़े का दावा जारी नहीं रख सकते और अधिकारियों ने वैकल्पिक आवास में सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन किया है।

पीठ ने कहा कि वह इस मामले में आदेश जारी करेगी। साथ ही, उसने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्वास की सुविधा उन लोगों के लिए है जो स्वेच्छा से जाने को तैयार हैं और कोई निवासी दो आवासों का दावा नहीं कर सकता।

अदालत ने कहा, ‘‘आदेश साफ है। जिन लोगों ने वैकल्पिक आवास ले लिया है, वे दो घर नहीं रख सकते।’’

एकल पीठ ने 11 मई को तीन झुग्गी बस्तियों के निवासियों को बेदखल करने के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और उन्हें 15 दिनों के भीतर कैंप खाली करने का आदेश दिया था।

इस महीने की शुरुआत में, अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार से कहा था कि वे तीन झुग्गी बस्तियों में अभी तक अपने घर खाली न करने वाले लोगों के खिलाफ फिलहाल जबरन कोई कार्रवाई न करे।

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत